गोंडा व आगरा की जिला पंचायतों के वर्ष 2011-12 से 2017-18 तक शराब ठेकेदारों पर मेहरबान रहने के कारण दुकानों से लाइसेंस शुल्क ही नहीं वसूला। इससे 1.09 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ।
गोंडा व आगरा की जिला पंचायतों के वर्ष 2011-12 से 2017-18 तक शराब ठेकेदारों पर मेहरबान रहने के कारण दुकानों से लाइसेंस शुल्क ही नहीं वसूला। इससे 1.09 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ। हालांकि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के खुलासे के बाद दोनों जिला पंचायतों ने मई-2019 तक 8.40 लाख रुपये वसूले।
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कैग की रिपोर्ट के मुताबिक आगरा ने देशी शराब की दुकान के लिए 5,000 रुपये व विदेशी शराब के लिए 6,000 रुपये प्रति वर्ष लाइसेंस शुल्क तय किया था। गोंडा में 13 सितंबर 2013 तक प्रति दुकान 1500 रुपये जबकि 14 सितंबर 2013 से 1725 रुपये शुल्क तय था। लेकिन, दोनों जिला पंचायतों ने ग्रामीण क्षेत्रों में सात वर्ष तक वसूली ही नहीं की। गोंडा में 25.03 लाख व आगरा में 84.29 लाख रुपये वसूली को लेकर दुकानदारों को नोटिस तक जारी नहीं किए गए।
आगरा में तो जिला पंचायत के पास सूची तक नहीं थी। मामला जांच में आने पर आबकारी विभाग से सूची मंगायी गई। जिला पंचायत गोंडा ने बताया कि मई-2019 में 4.06 लाख रुपये वसूल किए और अन्य को नोटिस जारी किए। इसी तरह आगरा ने 4.34 लाख की वसूली की। कैग ने कहा कि दोनों जिला पंचायतें वसूली के प्रति उदासीन रवैया अपनाए रहीं, इससे उन्हें स्वयं के संसाधनों से अपने राजस्व बढ़ाने से वंचित कर दिया।