राजधानी लखनऊ में बख्शी का तालाब की रेवामऊ ग्राम पंचायत में सड़क निर्माण हुए गबन और पार्क के सुंदरीकरण का दावा कर रकम हड़पने के प्रयास के मामले में जिम्मेदार अफसर जांच की फाइल ही दबाए बैठे रहे। यही वजह है कि आदेश के बावजूद डेढ़ महीने पहले दोषी ठहराए गए कर्मचारियों से अब तक न तो रकम की रिकवरी की जा सकी और न ही उन पर केस दर्ज कराया गया।
इन दोनों मामलों में प्रधान पूजा सिंह, तत्कालीन सचिव आनंद चतुर्वेदी, तत्कालीन तकनीकी सहायक राजेश कुमार गुप्ता व रोजगार सेवक को दोषी पाया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर गबन की गई एक लाख 39 हजार 42 रुपये की रिकवरी और इन पर केस दर्ज कराने का आदेश हुआ था। 26 अक्तूबर को ये आदेश हुआ था।
उच्चाधिकारियों की तरफ से तहरीर दी जाएगी
हैरानी की बात यह है कि एफआईआर से इन सभी को बचाने की कोशिश की जा रही है। सोमवार को खबर प्रकाशित हुई तो वर्तमान सचिव ने केवल रोजगार सेवक के खिलाफ महिंगवा थाने में तहरीर दी। उनका कहना है कि अन्य जो भी लोग दोषी पाए गए हैं, उन पर उच्चाधिकारियों की तरफ से तहरीर दी जाएगी।
बर्खास्तगी की लटकी तलवार
आरोपियों पर बेहद गंभीर आरोप हैं। जांच में आरोपों की पुष्टि भी हुई है। ऐसे में ये सभी कर्मचारियों पर बर्खास्तगी की भी कार्रवाई हो सकती है। इससे संबंधित कार्रवाई अब शुरू हुई है। जल्द इन सभी को नोटिस जारी किया जाएगा। उनका पक्ष सुनने के बाद कार्रवाई होगी। इसके पहले रिकवरी और एफआईआर कराई जाएगी।