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सम्मानजनक अंतिम संस्कार मौलिक अधिकार : हाईकोर्ट

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हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ। 
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लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी के कैंट क्षेत्र स्थित पिपराघाट श्मशान भूमि की दुर्दशा पर नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने श्मशान की बाउंड्रीवॉल और अन्य जर्जर संरचनाओं की तत्काल मरम्मत का आदेश दिया है। यह भी कहा है कि किसी व्यक्ति की गरिमा केवल जीवनकाल तक सीमित नहीं रहती बल्कि मृत्यु के बाद भी उसे सम्मानजनक अंतिम संस्कार मिलना उसका मौलिक अधिकार है। यह राज्य का दायित्व है कि प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था उपलब्ध हो।
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न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय निवासी शिव गुप्ता की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। संबंधित अधिकारियों को निर्देश भी दिया कि वे तत्काल स्थल का निरीक्षण करें और आवश्यक मरम्मत तथा जीर्णोद्धार कार्य सुनिश्चित करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि श्मशान घाटों की स्थिति ऐसी होनी चाहिए कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया गरिमा और सम्मान के साथ संपन्न हो सके। श्मशान घाट जैसी सार्वजनिक सुविधाओं की उपेक्षा न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है बल्कि यह मृतकों के सम्मान और उनके परिजनों की भावनाओं से भी जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है।
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