कार्यक्रम में मौजूद सीमैप के पदाधिकारी व अन्य
लखनऊ। सुगंधित फसलों की खेती से लेकर हर्बल उत्पादों के बड़े पैमाने पर उत्पादन तक, केंद्रीय औषधीय व सगंध पाैध संस्थान (सीमैप) ने शोध को खेतों और बाजार से जोड़ने की दिशा में कई कदम बढ़ाए हैं। मंगलवार को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के 85वें स्थापना दिवस पर सीमैप ने चार कंपनियों के साथ करार किया। इस दौरान मुस्कदाना (कस्तूरी भिंडी) की नई किस्म भी जारी की गई।
साथ ही उत्तर-पूर्व में सुगंधित फसलों की खेती बढ़ाने के लिए स्कूल ऑफ लाइवलीहुड एंड रूरल डेवलपमेंट असम के साथ समझौता हुआ। इसके तहत किसानों को बेहतर रोपण सामग्री, तकनीकी जानकारी, खेती में सहयोग और बाजार से जोड़ने की सुविधा मिलेगी।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रमेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गाजियाबाद की एयुमंत्र न्यूट्रास्युटिकल्स के साथ दर्द का तेल रिलैक्सोमैप, फ्लोर क्लीनर क्लीन जर्म और मच्छर निरोधक मोस्प्रे का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। कानपुर की क्रियोल बायोटेक के साथ दर्द और सूजन कम करने वाली जेल पेंनजा बनाई जाएगी। लखनऊ की श्री दिव्यम फ्रेगरेंस के साथ फूलों से अगरबत्ती और सुगंधित कोन बनाए जाएंगे। कर्नूल की धन्वंतरेया बायोटेक के साथ हल्दी और अश्वगंधा से उपयोगी तत्व निकालने पर काम होगा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसजीपीजीआई की डॉ. बनानी पोद्दार ने गंभीर मरीजों के उपचार में आराम और गरिमा को भी महत्व देने की बात कही। विशिष्ट अतिथि डॉ. अखिलेश गुप्ता ने सामाजिक प्रभाव वाले शोध पर जोर दिया। निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने बताया कि सीमैप अब तक 160 से अधिक पौध किस्में और खेती व प्रसंस्करण से जुड़ी तकनीकें विकसित कर चुका है।
कार्यक्रम में मौजूद सीमैप के पदाधिकारी व अन्य