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Lucknow News: गंगा-गोमती दोआब क्षेत्र में भूजल प्रदूषण पर होगा शोध

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बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय
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लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के दो प्रोफेसरों को गंगा-गोमती दोआब क्षेत्र में भूजल प्रदूषण पर शोध के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना मिली है। अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ), नई दिल्ली ने इस संयुक्त शोध परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। लगभग 75 लाख रुपये की लागत वाली यह परियोजना तीन वर्षों की अवधि के लिए स्वीकृत की गई है।
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इस परियोजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के गंगा-गोमती दोआब क्षेत्र में भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की स्थिति का शोध करना है। बीबीएयू में पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो. नरेंद्र कुमार और जैव प्रौद्योगिकी विभाग की डॉ. मोनिका इस शोध का नेतृत्व कर रही हैं। हाल के वर्षों में भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की बढ़ती मात्रा एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन गई है। आर्सेनिक के दीर्घकालिक संपर्क से त्वचा संबंधी रोग, हृदय संबंधी समस्याएं और कैंसर का खतरा होता है। फ्लोराइड की अधिक मात्रा से डेंटल फ्लोरोसिस और स्केलेटल फ्लोरोसिस जैसी समस्याएं होती हैं। जब ये दोनों प्रदूषक एक साथ भूजल में उपस्थित होते हैं, तो उनके प्रभाव मानव स्वास्थ्य, कृषि और पारिस्थितिकी तंत्र पर अधिक गंभीर होते हैं। यह शोध सुरक्षित पेयजल उपलब्धता और जनस्वास्थ्य संरक्षण में योगदान देगा।

प्रदूषण के स्रोतों और कारणों की करेंगे पहचान
प्रो. नरेंद्र कुमार और डॉ. मोनिका ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक मानचित्रण किया जाएगा। प्रदूषण के स्रोतों और कारणों की पहचान की जाएगी। भूजल की गतिशीलता का अध्ययन होगा और व्यावहारिक व टिकाऊ शमन उपाय विकसित किए जाएंगे। शोध से प्राप्त निष्कर्ष नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक संस्थाओं और स्थानीय समुदायों को सुरक्षित पेयजल प्रबंधन के लिए उपयोगी वैज्ञानिक आधार प्रदान करेंगे। यह परियोजना गंगा-गोमती क्षेत्र में जल गुणवत्ता सुधार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक कदम है।
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