सीबीएमआर के 19वें वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व अन्य।
लखनऊ। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि रोगियों को आधुनिक इलाज उपलब्ध कराने के लिए शोध जरूरी है। सेंटर ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च (सीबीएमआर) इस दिशा में अहम भूमिका अदा कर रहा है। वे बुधवार को एसजीपीजीआई में सीबीएमआर के 19वें वार्षिकोत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
पाठक ने कहा कि सीबीएमआर रोगियों की समस्याओं के लिए डॉक्टरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहा है। यहां होने वाले शोध को भारत व विश्व पटल पर पहचान मिली है। आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने के लिए बीते वर्षों में प्रदेश सरकार के नेतृत्व में संस्थान में कई नीतिगत निर्णय लिए गए। इससे संस्थान में बदलाव देखने को मिला है। अब सीबीएमआर को नेशनल ट्रांसलेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट के रूप में स्थापित करने की तैयारी है। उन्होंने पेटेंट को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से समझौता करने का आह्वान किया।
व्यावसायीकरण की दिशा में हो रहा काम
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि व्यावसायीकरण की दिशा में भी काम हो रहा है। आईआईटी बॉम्बे के साथ विकसित की गई एक टेक्नोलॉजी के व्यावसायीकरण के लिए सीबीएमआर ने केंद्र सरकार के उपक्रम नेशनल रिसर्च डेवलपमेंट काउंसिल से समझौता किया है। कार्यक्रम में अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. संजीव मिश्र, कानपुर आईआईटी के डॉ. आशुतोष वर्मा, केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक, सीबीएमआरआई के डीन डॉ. नीरज सिन्हा, लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह आदि मौजूद रहे।
निदेशक ने बताईं उपलब्धियां
सीबीएमआर के निदेशक डॉ. आलोक ने कहा, नए शोध को बढ़ावा देने के लिए अहम कदम उठाए गए हैं। नए विभागों का गठन किया गया है। इनमें अमेरिका, जर्मनी और स्वीडन के प्रतिष्ठित संस्थानों से आठ वैज्ञानिकों का चयन हुआ है। साथ ही आंतरिक अनुसंधान परियोजनाओं के माध्यम से ट्रांसलेशन अनुसंधान को बढ़ावा दिया गया, जिससे प्रौद्योगिकियों का विकास हो रहा है। कई शोध पत्र ख्याति प्राप्त अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। बताया कि बीते तीन वर्षों में 14 पेटेंट दाखिल हुए। चार पेटेंट स्वीकृत हुए।