रेरा के आदेश के मुताबिक, परियोजनाओं के एस्क्रो एकाउंट से 10 फीसदी से अधिक खर्च करने के लिए रेरा की अनुमति लेनी होगी। यह आदेश उन बिल्डर कंपनियों पर भी लागू होगा, जिन्होंने एफएसआई में भूखंड या प्रोजेक्ट अंसल एपीआई से लिए हैं।
बिना बिकी संपत्तियों से जुटाएंगे रकम, लौटाएंगे आवंटियों का पैसा
रेरा सदस्य बलविंदर कुमार का कहना है कि सुशांत गोल्फ सिटी के फंड दूसरे प्रोजेक्टों में ट्रांसफर किए गए हैं। इस कारण प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए पैसा बिल्डर के पास बचा ही नहीं। उनके अधिवक्ता ने खुद खाते में पैसा न होने की बात स्वीकार की है। एक ऑडिटर भी नियुक्त किया जा रहा है, जो हाईटेक सिटी में मौजूद बिना बिक्री वाली संपत्तियों को चिह्नित करेगा। ऐसी संपत्तियों की सूची तैयार करके उननी कीमत का आकलन किया जाएगा। उससे मिलने वाली रकम से आवंटियों का पैसा लौटाया जाएगा। अंसल एपीआई बिना रेरा की अनुमति के नई संपत्तियां भी नहीं बेच सकेगा।
बलविंदर कुमार का कहना है कि यूके की कंपनी करी एंड ब्राउन के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए इससे फोरेंसिक ऑडिट कराया जा सकता है। नोएडा प्राधिकरण के साथ-साथ यह कंपनी दुनिया के प्रमुख सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों के वित्तीय ऑडिट का काम देखती है।
अंसल नहीं बता पाया कि कैसे पूरे होंगे प्रोजेक्ट
रेरा में बिल्डर की तरफ से कोई ठोस कार्ययोजना नहीं दी जा सकी है। अंसल एपीआई के अधिकारी रेरा को यह बताने में विफल रहे कि किस तरह अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा। कई मामलों में तो प्रोजेक्ट पूरा करने की पूर्व निर्धारित तारीख से भी चार-पांच साल बाद की डेडलाइन बताई गई है।