सुबह-ए-बनारस के दीदार के लिए शुक्रवार की सुबह खुशनुमा माहौल में दशाश्वमेध घाट से नाव पर निकले क्योटो के डिप्टी मेयर केनिची ओगासवारा को गंगा किनारे गंदगी देख पसीने छूट गए।
नाव से उतरने के बाद उन्होंने आहत स्वर में कहा भी कि किनारों पर बहुत ज्यादा गंदगी है। उन्होंने घाटों पर जमा सिल्ट और कचरे की तस्वीरें भी कैमरे में कैद की। गंगा को प्रदूषण मुक्त कराने को गंभीर चुनौती बताते हुए इस काम में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
ओगासवारा की अगुआई में जापानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य सुबह 5:30 बजे दशाश्वमेध घाट पहुंचे। यहां से नौका विहार करते हुए सभी अस्सी घाट गए। वहां से राजघाट तक गए और फिर राजेंद्र प्रसाद घाट लौट आए।
इस दौरान उन्होंने घाटों और इमारतों के इतिहास, नामकरण के बारे में जानकारी ली। नाव से उतरने के बाद केनिची ने आहत स्वर में कहा कि गंगा तट पर बहुत ज्यादा गंदगी है, जबकि बीच में नदी साफ है। स्थानीय प्रशासन को इस पर गंभीरता से काम करना चाहिए। नदी में मिल रहे दूषित पानी के प्रवाह को रोकने के लिए ठोस उपाय किए जाने चाहिए।
भारत सरकार को रिपोर्ट देगा जापानी प्रतिनिधिमंडल
केनिची ने कहा कि इस समस्या के निराकरण के लिए जापान तकनीकी और आर्थिक मदद देगा। अगली बार जो जापानी प्रतिनिधिमंडल काशी के दौरे पर आएगा वह गंगा के संबंध में विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर अपनी रिपोर्ट भारत सरकार को देगा।
गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए बताए उपाय:
- नदी में साबुन, डिटर्जेंट और पूजन सामग्री बहाने पर सख्ती से रोक लगे।
- घाटों पर पूजन सामग्री व खाद्य सामग्री के लिए अलग-अलग कूड़ेदान हों।
- नदी में मिल रहे नाले-नालियों का प्रवाह रोका जाए।
- घाटों पर छोटे-छोटे भूमिगत एसटीपी बनाए जाएं।
- स्थानीय प्रशासन नदी के निर्मलीकरण के लिए लोगों को जागरूक करे।
- नदी को दूषित करने वालों पर कानूनी शिकंजा कसा जाए।
पांच साल में गंगा हो जाएंगी निर्मल
जापानी प्रतिनिधिमंडल में शामिल जापानी दूतावास के अधिकारी ने कहा कि यदि सब कुछ हमारे तरीके से हुआ तो अगले पांच साल में गंगा को निर्मल बनाया जा सकता है। उन्होंने दो टूक कहा कि गंगा की दुर्दशा के लिए यहां के नीति निर्धारकों की अदूरदर्शी नीतियां, बाजार का दबाव और नदी के प्रति लोगों का उपेक्षात्मक रवैया जिम्मेदार है।
दो दिन काशी भ्रमण के बाद हमारा यही अनुभव है कि विकास के लिए सबसे पहले काशीवासी खुद आगे आएं और काशी का महत्व समझ कर कदम आगे बढ़ाएं।
‘नदी में सांप क्यों तैर रहा है, किसी को डस ले तो...’
नौकायन के दौरान क्योटो के डिप्टी मेयर को गंगा में एक सांप तैरता दिखा तो वे हैरान होकर बोले कि इस तरह से सांप तैर रहा है। यदि किसी को डस लिया तो? तब नगर निगम के अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि यह पानी वाला सांप है, किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता।