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जंगल बनाम गांव की जंग: न दिन में चैन, न रात को नींद, मां-बाप के सामने ही तेंदुए का निवाला बन रहे दिल के टुकड़े

Wed, 18 Feb 2026 01:07 PM IST
ishwar ashish अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ

सार

बहराइच के कतर्निया के जंगलों के किनारे बसे कई गांवों के लोग दहशत में जीवन गुजार रहे हैं। अक्सर ऐसी घटनाएं होती हैं जब जंगली जानवर उनके बच्चों और मवेशियों का शिकार कर लेते हैं। दहशत का आलम ये है कि अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डरने लगे हैं। बच्चे खुलकर खेलकूद नहीं कर पा रहे हैं। कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य से अजित बिसारिया की रिपोर्ट: 
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bahraich - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पूनम 29 जनवरी की शाम परिवार के लिए भोजन पका रही थीं। उनकी पांच वर्ष की बेटी अनुष्का जिद कर रही थी कि तेज भूख लग रही है। जल्दी कुछ खाने को दो। पूनम का पूरा ध्यान भोजन पकाने पर था। इसी बीच टटिया तोड़कर घर में तेंदुआ घुस आया। अनुष्का की गर्दन जबड़े में दबाई और ले भागा। शोर मचाकर लोगों को बुलाने तक का मौका मां को नहीं मिला। जिस बेटी को निवाले का इंतजार था, वो खुद तेंदुए का निवाला बन गई।

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यह एक गांव या एक परिवार का दर्द नहीं है। बहराइच में कतर्निया के जंगलों के किनारे बसे कई गांवों और मांओं की पीड़ा है। ऊपर सुनाई गई व्यथा बहराइच के गांव रम्पुरवा की है। पूनम सदमे में हैं। न कुछ बोल पा रही हैं और न खाना खा पा रही हैं। हम जब उन तक पहुंचे तो पूनम की मां बिजली देवी ने घटना का पूरा ब्योरा दिया। इस क्षेत्र में पिछले 10-12 दिनों में ही तेंदुओं के हमलों में तीन बच्चों की मौत हुई है।

गांव के ही बद्री चौहान बताते हैं कि बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर लगता है। शाम होते ही उन्हें घरों में बंद कर देते हैं। वे ढंग से खेल-कूद तक नहीं पाते। तेंदुओं का खौफ इस कदर है कि बकरियों को चारपाई के नीचे बांधकर रखते हैं। कुत्ते भी सूर्यास्त होने से पहले खुद ही घर के अंदर आकर बैठ जाते हैं। 60-70 घरों वाले गांवों में सिर्फ 2-3 कुत्ते ही बचे हैं। बाकी तेंदुओं का भोजन बन चुके हैं। हीरालाल ने बताया कि तारों से जंगल की फेंसिंग की गई लेकिन उसे हाथियों ने तोड़ दिया। अगर फेसिंग सही रहती तो राहत मिल सकती थी।
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मोतीपुर के भगवान बताते हैं कि हाल ही में तेंदुए ने उनके गांव में एक बच्चे पर हमला किया, वो गिरा तो उसके आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया।

ग्रामीण बोले, उजाले से डरते हैं जानवर, सूर्यास्त से सूर्योदय तक दे दें बिजली

ग्रामीणों ने समस्या के कई समाधान भी बताए। कारीकोट के किसान अभयजीत ने कहा कि वन विभाग हल्के सोलर करंट वाली ज्यादा मजबूत फेसिंग करे। मटेहों के रामअवतार का सुझाव था कि तेंदुओं के हमले की ज्यादातर घटनाएं शाम 6 से रात 8 बजे के बीच हो रही हैं। अगर सूर्यास्त से सूर्योदय तक बिजली आपूर्ति मिल जाए तो घटनाओं में काफी कमी आ सकती है। उनका मानना है कि जहां रोशनी होता है, वहां खूंखार वन्यजीव आने से बचते हैं। तिगड़ा के चटुक कहते हैं कि उजाले से वन्यजीवों को डर लगता है।

... यहां खतरों भरी जिंदगी से मुक्ति की खुशी
कतर्निया के जंगल के बीच और चारों ओर से नदियों से घिरा गांव है भरबापुर। नाव ही गांव तक आने-जाने का इकलौता जरिया है। कुछ दिनों पहले नाव पलटने से यहां कई लोगों की मौत हो गई थी। अब सरकार ने इस गांव को दूसरी जगह पर शिफ्ट करने का फैसला किया है। नदी किनारे नाव का इंतजार करते हमें अमन मौर्य और उनके चाचा जोगेंद्र मौर्य मिले। अमर कहते हैं कि सरकार की ओर से हाईवे के किनारे सेमराहना में प्लॉट और उस पर घर बनाने के लिए मदद मिल रही है। 136 परिवार चिह्नित किए गए हैं। हालांकि, उनके समेत 60 लोगों का नाम अभी योजना में शामिल नहीं किया गया है।
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मानव-वन्यजीव संघर्ष में मृतक व घायल

 
वर्ष  मृत घायल
2012-13 22 42
2013-14 26 49
2014-15 21 18
2015-16 14 45
2016-17 28 40
2017-18 33 52
2018-19 21 43
2019-20 45 74
2020-21 38 98
2021-22 30 71
2022-23 54 103
2023-24 84 174
2024-25 60 22

(ये घटनाएं कतर्नियाघाट, दक्षिणी खीरी, बहराइच, उत्तरी खीरी, पीलीभीत और बिजनौर के ड्रानाकों में हुई हैं। स्रोत: वन विभाग)
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