ग्रामीणों ने समस्या के कई समाधान भी बताए। कारीकोट के किसान अभयजीत ने कहा कि वन विभाग हल्के सोलर करंट वाली ज्यादा मजबूत फेसिंग करे। मटेहों के रामअवतार का सुझाव था कि तेंदुओं के हमले की ज्यादातर घटनाएं शाम 6 से रात 8 बजे के बीच हो रही हैं। अगर सूर्यास्त से सूर्योदय तक बिजली आपूर्ति मिल जाए तो घटनाओं में काफी कमी आ सकती है। उनका मानना है कि जहां रोशनी होता है, वहां खूंखार वन्यजीव आने से बचते हैं। तिगड़ा के चटुक कहते हैं कि उजाले से वन्यजीवों को डर लगता है।
... यहां खतरों भरी जिंदगी से मुक्ति की खुशी
कतर्निया के जंगल के बीच और चारों ओर से नदियों से घिरा गांव है भरबापुर। नाव ही गांव तक आने-जाने का इकलौता जरिया है। कुछ दिनों पहले नाव पलटने से यहां कई लोगों की मौत हो गई थी। अब सरकार ने इस गांव को दूसरी जगह पर शिफ्ट करने का फैसला किया है। नदी किनारे नाव का इंतजार करते हमें अमन मौर्य और उनके चाचा जोगेंद्र मौर्य मिले। अमर कहते हैं कि सरकार की ओर से हाईवे के किनारे सेमराहना में प्लॉट और उस पर घर बनाने के लिए मदद मिल रही है। 136 परिवार चिह्नित किए गए हैं। हालांकि, उनके समेत 60 लोगों का नाम अभी योजना में शामिल नहीं किया गया है।