सोमनाथ से अयोध्या की कारसेवा में शामिल होने के लिए निकले लालकृष्ण आडवाणी ने समस्तीपुर से रिहा होने के बाद वहां से दिल्ली और फिर अयोध्या सड़क मार्ग से यात्रा करके राजनीतिक मिजाज के पारे को पहले ही गरमा रखा था। मौसम भी गरम हो रहा था। ‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ नारों के साथ विश्व हिंदू परिषद ने कारसेवकों का अस्थिकलश गांव-गांव घुमाकर, हिंदू हितों की बात करने वाले राजनीतिक दल को ही समर्थन का आह्वान करके आडवाणी की यात्रा से ऊपर चढ़े सियासी पारे को और चढ़ाना शुरू कर दिया। इसी गरम माहौल में चुनाव की घोषणा हुई।
प्रोजेक्टर से दिखाया गया अयोध्या का घटनाक्रम
अयोध्या आंदोलन के सूत्रधार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शायद परदे के पीछे इस चुनाव को लड़ने का पूरा खाका पहले ही खींच रखा था। चुनाव की घोषणा के साथ ही दिल्ली से बड़ी संख्या में प्रोजेक्टर व वीसीआर के जरिये कारसेवा के दौरान सुरक्षा बलों की गोलियों से मारे गए कोठारी बंधुओं के शव, अशोक सिंघल पर पुलिस की लाठियों के वार, संतों के साथ अभद्र व्यवहार की वीडियो क्लिप के साथ तैयार की गई फिल्मों को गांव-गांव दिखाना शुरू कर दिया।
तीखे भाषण देने वाले साधु-संतों की चुनाव प्रचार में जबर्दस्त मांग थी। साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती, आचार्य धर्मेंद्र, अशोक सिंघल को सुनने के लिए लोग देर रात तक सभाओं में जमे रहते। इनके भाषणों पर भीड़ का जोश कई बार सारी सीमाओं को पार कर जाता। साध्वी ऋतंभरा के भाषण के बाद कुछ इलाकों में तनाव जैसे हालात भी सामने आए। पर, राजनीति में सारा कुछ परिणाम पर निर्भर करता है, जो भाजपा के पक्ष में रहा।