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लखनऊ से राहत की खबर, डिस्चार्ज होने का बढ़ा ग्राफ, मरीजों की संख्या में भी कमी

Mon, 19 Apr 2021 03:36 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

कोरोना की दूसरी लहर से कराह रही राजधानीवासियों के लिए राहत भरी खबर है। चिकित्सा विशेषज्ञ का कहना है कि कुल मिलने वाले मरीजों की अपेक्षा डिस्चार्ज होने का ग्राफ 50 फीसदी तक पहुंच गया तो गंभीर मरीजों को अस्पतालों में बेड मिलने लगेंगे।
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कोविड की जांच कराते लोग।
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विस्तार
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कोरोना की दूसरी लहर से कराह रही राजधानीवासियों के लिए राहत भरी खबर है। रविवार को कुल मिले मरीजों की अपेक्षा डिस्चार्ज होने वाले मरीजों का प्रतिशत 42.29 फीसदी रहा। चिकित्सा विशेषज्ञ से राहत की किरण के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि कुल मिलने वाले मरीजों की अपेक्षा डिस्चार्ज होने का ग्राफ 50 फीसदी तक पहुंच गया तो गंभीर मरीजों को अस्पतालों में बेड मिलने लगेंगे।

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राजधानी में लगातार बेड़ों  की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के सामने यह नाकाफी साबित हो रहे हैं। कोरोनावायरस से संक्रमित ओं की संख्या 5000 से अधिक होने के सप्ताह भर बाद डिस्चार्ज होने वालों का ग्राफ भी बढ़ने लगा है। 

रविवार को कुल 5551 मरीज पाए गए जबकि 2348 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। एक्टिव केस 44700 है। अप्रैल माह में डिस्चार्ज होने वालों की यह सबसे बड़ी संख्या है। कुल मिलने वाले मरीजों की अपेक्षा डिस्चार्ज होने वालों का ग्राफ देखा जाए तो 12 अप्रैल को कुल मिले मरीजों की अपेक्षा 24 फीसदी लोग डिस्चार्ज हुए थे। जो 18 अप्रैल को बढ़कर 42.29 तक पहुंच गया है। 
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एक नजर में 
अप्रैल          मरीज        डिस्चार्ज       

12            3892        958
13            5382        1086
14            5433        1118  
15            5183         973
16            6598        1675
17            5913        2176
18            5551        2348

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निरंतर डिस्चार्ज का ग्राफ बढ़ने की उम्मीद 

केजीएमयू के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर संजीव कुमार का कहना है कि डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होने की उम्मीद है। क्योंकि सप्ताह भर में तेजी से मरीजों की संख्या बढ़ी है। इन्हें अस्पताल में रखकर उपचार किए जाने से हालत में सुधार हुआ है। आमतौर पर देखा गया है कि सप्ताह भर बाद मरीज डिस्चार्ज होने की स्थिति में आ जाते हैं। डिस्चार्ज होने वालों का ग्राफ बढ़ना हालात के मद्देनजर सकारात्मक संकेत हैं। 

नई गाइडलाइन का भी मिल रहा है फायदा
अभी तक कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों को 10 से 14 तक अस्पताल में रखा जा रहा था। लेकिन कुछ दिनों से चिकित्सा विशेषज्ञ मरीजों की स्थिति के अनुसार सप्ताह भर बाद ही उन्हें डिस्चार्ज करना शुरू कर दिए थे। अब शासन की ओर से यह गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है कि लक्षन खत्म होते ही संबंधित मरीज को डिस्चार्ज कर दिया। ऐसे में यह भी उम्मीद है कि इस सप्ताह डिस्चार्ज होने का ग्राफ और तेज हो जाएगा। 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
लोहिया संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राजीव रतन सिंह कहते हैं कि डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत है। सरकार की ओर से बेड बनाने का प्रयास किया जा रहा है और डिस्चार्ज होने वालों का भी ग्राफ बढ़ रहा है। इससे नए मिलने वाले मरीजों को भर्ती करने में सहूलियत होगी। क्योंकि प्रतिदिन वायरस की चपेट में आने वालों में करीब 25 फ़ीसदी गंभीर मरीज होते हैं। ऐसे में डिस्चार्ज होने वालों का ग्राफ बढ़ता रहा तो गंभीर मरीजों को बेड मिलने लगेंगे।

5551 नए मामले और 22 की मौत
राजधानी में रविवार को भी संक्रमण की मार थोड़ी कम रही। इसका नतीजा रहा कि संक्रमितों के आंकड़ों में दूसरे दिन भी गिरावट आई। पिछले 24 घंटे में 5551 नए मामले सामने आए और संक्रमण की वजह से 22 लोगों की जान चली गई। इससे पहले शनिवार को 5913 नए मामले मिले थे और 36 मरीजों की सांसें थम गईं थीं।

शुक्रवार को 6598 मरीज मिले थे और 36 संक्रमितों की जान चली गई थी। राजधानी में सक्रिय केसों की संख्या बढ़कर 47700 हो चुकी है। पूरी आशंका है कि यह 50 हजार पार हो जाएगी। वहीं, 2348 मरीजों ने कोरोना को मात दी।

अब तक कोरोना ने छीनीं 1503 की जिंदगी
पिछले साल तक संक्रमण से जान गंवाने वालों की संख्या कंट्रोल में थी। इस साल संक्रमण बढ़ने के साथ ही मौत का आंकड़ों भी तेजी से बढ़ रहा है। पिछले साल से लेकर अब तक संक्रमण से कुल 1503 मरीजों की मौत हो चुकी है। इसमें तीन सौ के करीब अकेले अप्रैल में ही हुई हैं।
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