नोटबंदी और कैश की कमी के बीच राजधानी के एटीएम दिनभर में सिर्फ 80 लोगों की जरूरत ही पूरी कर पा रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब इन्हें दिन में दो बार भरा जा रहा है। हालांकि बुधवार को जब बैंक खुले तो हालात कुछ सुधरे नजर आए।
हफ्ते भर के मुकाबलें बैंक शाखाओं पर भीड़ कुछ कम थी, लेकिन एटीएम बूथ पर लंबी कतारें लगी रहीं। कैश न मिल पाने की निराशा के बीच हर कोई पहले रुपये निकालने को उत्सुक था और इस कारण कई बार तनाव और विवाद की स्थिति बनी रही।
दरअसल एटीएम में 100 रुपये के नोट ही भर पाने की वजह से इनमें एक बार में 1,000 पीस (एक लाख रुपये) भरे जा रहे हैं। दिन भर में कैश वैन किसी एटीएम पर अधिकतम दो दफा पहुंच रही है, लेकिन 2400 रुपये निकाले की अनुमति की वजह से यह रकम 80 से 100 लोगों के लिए ही काफी पड़ रही है।
वहीं राजधानी के कुल 840 एटीएम में से 20 फीसदी खराब हैं। दूसरी तरफ जहां एटीएम ठीक हैं, वहीं पैसा नहीं डाले जाने से लोगों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं।
हर कोई पहले काम करवाने पर अड़ा
कई बैंक शाखाओं और एटीएम के बाहर खड़े लोगों में मारपीट हुई। आलमबाग चौराहे पर आईसीआईसीआई बैंक के बाहर बैंक के ग्राहकों और नोट बदलवाने आए नागरिकों के बीच अपना काम पहले करवाने को लेकर विवाद हुआ, जिसमें कुछ लड़कों ने कृष्णानगर के अमित किशोर और भानु सिंह से मारपीट की। यही हालात भीड़ जुटने पर कई हिस्सों में रहे।
गोमतीनगर के विजय खंड स्थित पीएनबी में अपना पैसा बदलवाने आए आशु तिवारी ने बताया कि वे मंगलवार को भी बैंक पहुंचे थे, लेकिन लाइन लंबी होने की वजह से इंतजार करने के बाद लौट गए थे। बुधवार को भीड़ कम होने से उन्हें उम्मीद थी कि उनका नंबर जल्दी आएगा।
...लेकिन नए इंतजामों से नागरिक परेशान
सात नवंबर के बाद बैंकों में दबाव कुछ कम हुआ है। यहां लाइनें अब कुछ छोटी हुई हैं, लेकिन कैश की कमी से पैदा हुए हालात नहीं सुधर रहे। कई शाखाएं ग्राहकों को मांग के अनुरूप पैसा नहीं दे रहीं, बल्कि दो या चार हजार रुपये देकर लौटा रही हैं।
वहीं, बैंक स्टाफ भी लगातार हो रही हिंसा और हाथापाई की घटनाओं से अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। फौरी तौर पर अधिकतर शाखाओं ने टोकन सिस्टम और ग्राहकों को कार्यालय से बाहर ही रखने का तरीका अपनाया है।
टोकन नंबर आने पर चार-चार या 10-10 के समूह में ग्राहकों को कार्यालय में आने दिया जा रहा है। अमीनाबाद की बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में दोपहर एक बजे पहुंचे जावेद हारुन ने बताया कि यहां लोगों को बैंक में अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है।
बैंक स्टाफ ने सड़क पर ही लाइन लगाने के निर्देश दे दिए। इससे लोग अपने वाहन सड़क किनारे खड़ा कर लाइन में लग रहे हैं। पैसा जमा कराने आईं खातूना बानो ने बताया कि सुबह से ही यह स्थिति है।
स्याही के इंतजार नहीं बंदले गए रुपये
केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि पैसा बदलवाने वालों को मतदान के दौरान लगाई जाने वाली स्याही का निशान लगाया जाएगा।
राजधानी में ऐसा नहीं किया गया। स्टेट बैंक ऑफ ऑफ इंडिया की साउथ सिटी की शाखा ने स्याही के इंतजार में लोगों के पैसे ही नहीं बदले।
यहां के शाखा प्रबंधक वेद प्रकाश का कहना था कि चूंकि स्याही नहीं है, इसलिए वे इंतजार कर रहे हैं, जिसके आने के बाद नोट बदलने का काम शुरू होगा। जबकि यहीं पास में स्थित ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की शाखा में बगैर स्याही लगाए नोट बदले गए।