लिवर प्रत्यारोपण की राह देख रहे मरीजों को केजीएमयू में शनिवार को हुए प्रत्यारोपण के बाद उम्मीद जाग गई है। संस्थान अगले महीने चार से छह प्रत्यारोपण करने की तैयारी कर रहा है। प्रत्यारोपण के लिए डोनर मिल चुके हैं। मरीजों की जांच और अन्य तैयारी पूरी की जा रही हैं।
केजीएमयू में शनिवार को प्रो. अभिजीत चंद्रा (एचओडी सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी) के नेतृत्व में लिवर ट्रांसप्लांट किया गया था। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज और डोनर दोनों की हालत सामान्य है। यह सर्जरी सुबह छह बजे शुरू हुई और करीब 13 घंटे बाद देर शाम खत्म हुई। टीम में उनके साथ डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. मोहम्मद परवेज शामिल थे। केजीएमयू में प्रत्यारोपण समन्वयक पीयूष श्रीवास्तव और क्षितिज वर्मा अब वेटिंग वाले मरीजों के प्रत्यारोपण की तैयारियां शुरू कर रहे हैं।
साल भर से लाइन में हैं सौ से ज्यादा मरीज
लिवर के मरीजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने वर्ग का डोनर तलाशना होती है। केजीएमयू में कोरोना संक्रमण से करीब सवा साल पहले 106 मरीजों की सूची डोनर तलाश में वेबसाइट पर पड़ी हुई है। इस बीच काफी मरीज बढ़ चुके हैं। प्रत्यारोपण न हो पाने की वजह से दुर्भाग्यवश कई मरीजों की जान भी जा चुकी है।
अन्य संस्थानों से आधी कीमत पर होता है प्रत्यारोपण
केजीएमयू में लिवर प्रत्यारोपण अन्य संस्थानों के मुकाबले आधे खर्चे पर हो जाता है। आमतौर पर लिवर प्रत्यारोपण की लागत 25 से 30 लाख रुपये की बीच होती है। वहीं दूसरी ओर केजीएमयू में इसकी लागत 10 से 15 लाख रुपये ही आती है। आयुष्मान कार्ड धारकों को यह शुल्क भी नहीं देना पड़ता है।
फिलहाल सिर्फ केजीएमयू में ही सुविधा
लखनऊ में अभी तक केजीएमयू और पीजीआई ही लिवर प्रत्यारोपण करते रहे हैं। पीजीआई ने शुरुआत करने के बाद लिवर प्रत्यारोपण बंद कर दिया है। अब सिर्फ केजीएमयू ही ऐसा सरकारी संस्थान है, जहां पर लिवर प्रत्यारोपण की सुविधा है।
केजीएमयू ने विपरीत परिस्थितियों के बाद भी प्रत्यारोपण की शुरुआत की है। चार से छह मरीजों को डोनर मिल चुके हैं। इनके प्रत्यारोपण की तैयारी शुरू कर दी गई हैं। अगले महीने तक इनका प्रत्यारोपण करने की योजना है।
- डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू