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Lucknow News: दिव्यांगजनों के सहायक उपकरणों की गुणवत्ता पर काम करेगा पुनर्वास विवि

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लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय दिव्यांगजनों के कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और इस्तेमाल में होने वाली प्रतिकूल घटनाओं की वैज्ञानिक निगरानी करेगा। विवि ने इसके लिए बुधवार को भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ समझौता किया।
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दोनों संस्थान मैटेरियोविजिलेंस, संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण, कार्यशालाओं, सेमिनारों और वैज्ञानिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। विवि सहायक उपकरणों से जुड़ी शिकायतों और प्रतिकूल घटनाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण कर भारतीय फार्माकोपिया आयोग के साथ साझा करेगा, जिससे उपकरणों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को और बेहतर बनाया जा सके। इसके संचालन के लिए विवि के कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र और फैकल्टी ऑफ फार्मेसी को नोडल इकाई बनाया गया है।

खराब उपकरणों से आते हैं प्रतिकूल प्रभाव
आयोग के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलाईसेलवन ने कहा कि उपकरण के इस्तेमाल के दौरान यदि तकनीकी खराबी या प्रतिकूल प्रभाव सामने आते हैं तो उनका वैज्ञानिक अभिलेखीकरण व विश्लेषण बेहद जरूरी है। पुनर्वास विवि दिव्यांगजनों की शिक्षा और पुनर्वास का प्रमुख संस्थान है। इस सहयोग से मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी और चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता सुधार के लिए विश्वसनीय वैज्ञानिक आंकड़े उपलब्ध होंगे।
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