लखनऊ। बीते कुछ समय से स्तन कैंसर को लेकर जागरूकता देखने को मिली है। यही वजह है कि अब तीसरे और चौथे के बजाय पहले और दूसरे स्टेज के मरीजों की संख्या अधिक आ रही है। इससे स्तन कैंसर से होने वाली मौतों में भी कमी आई है। केजीएमयू के सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार ने शनिवार को जागरूकता कार्यक्रम में ये बातें कहीं।
डॉ. विजय के मुताबिक स्तनपान न कराने वाली और ज्यादा उम्र में शादी करने वाली महिलाओं में इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. समीर गुप्ता ने बताया कि अब नई तकनीकों से बेहद कम समय और कम साइड इफेक्ट्स के कैंसर का इलाज मुमकिन है। कार्यक्रम में कैंसर विजेता महिला ने बताया कि स्तन में गांठ होने के बाद शर्म के चलते उन्होंने घर पर कुछ नहीं कहा। दो महीने बाद समस्या बढ़ने पर परिवारीजनों को जानकारी दी। दो साल के इलाज के बाद अब वह स्वस्थ हैं।
24 में से एक महिला को कैंसर का खतरा
डॉ. नसीम अख्तर ने बताया कि 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र की हर 24 महिलाओं में से एक को स्तन कैंसर का खतरा होता है। सतर्कता से इसके खतरों से काफी हद तक बच सकते हैं। स्तन, ऊपरी छाती या बगल में गांठ या सूजन नजर आए तो संजीदा हो जाना चाहिए। त्वचा में परिवर्तन, सिकुड़न या गड्ढे पड़ने पर भी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। हर महिला को 40 साल के बाद मैमोग्राफी जांच करानी चाहिए। अपने हाथ से भी गांठ की जांच करनी चाहिए।