लखनऊ। महात्मा गांधी की पहल पर बने चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कॉलेज के सभी शिक्षकों सहित कर्मचारियों को दूसरे कॉलेजों में समायोजित कर दिया गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र पांडेय ने इसकी जानकारी दी है।
शिक्षिका सुमन शुक्ला को नारी शिक्षा निकेतन, सुनीता को विद्यांत हिंदू इंटर कॉलेज, अश्वनी भट्ट को नारी शिक्षा निकेतन, अशिंता को शशिभूषण बालिका विद्यालय, सीमा श्रीवास्तव को वैदिक कन्या इंटर कॉलेज, रश्मि सारस्वत व प्रीति गौतम को बालिका विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, रंजना कनौजिया को बप्पा श्री नारायण इंटर कॉलेज, मीनाक्षी गुप्ता को डीएवी इंटर कॉलेज, अंजू चौधरी को राष्ट्रीय उद्योग आश्रम इंटर कॉलेज, सारिका श्रीवास्तव को कस्तूरबा कन्या इंटर कॉलेज भेजा गया है।
इसके अलावा वंदना मिश्रा को गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज, वैशाली अवस्थी को स्वामी योगानंद इंटर कॉलेज, उर्मिला चौधरी को बप्पा श्री नारायण वोकेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज, काजल वाजपेयी को राम भरोसे मैकूलाल इंटर कॉलेज, प्रियंका त्रिपाठी को हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज, कुन्नी देवी को वैदिक कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज में समायोजित किया गया है। कर्मचारियों में प्रणव सनवाल को भारतीय बालिका विद्यालय इंटर कॉलेज, मो. अकरम खान को विष्णुनगर शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज, नरेंद्र पाल को यशोदा रस्तोगी इंटर कॉलेज, वीर विक्रम सिंह को भारतीय बालिका इंटर कॉलेज, राजा बाल्मीकि को विद्या मंदिर हाईस्कूल नरही और सौरभ कश्यप को भारतीय बालिका इंटर कॉलेज भेजा गया है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर बंद हुआ था कॉलेज
बीती 20 मई को हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार ने चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कॉलेज को बंद करवा दिया था। कहा गया था कि हाईकोर्ट का निर्देश है कि कॉलेज भवन जर्जर है, इसलिए शिक्षकों व बच्चों को दूसरे विद्यालय में समायोजित कर दिया जाए। इसके बाद बच्चों को दूसरे विद्यालयों में तत्काल प्रवेश दिला दिया गया था।
अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
विद्यालय खाली होने के बाद अमर उजाला ने मु्द्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद प्रबंधक पवन वर्मा ने दावा किया था कि विद्यालय का नया भवन बनाया जाएगा। विद्यालय बंद नहीं होने दिया जाएगा।
कोट.....
चुटकी भंडार गर्ल्स कॉलेज का नया भवन बनने तक शिक्षकों व कर्मचारियों का दूसरे विद्यालयों में समायोजन किया गया है। इन शिक्षकों की ज्वॉइनिंग कॉलेजों के प्रधानाचार्या को करानी होगी। इसमें प्रबंधक से कोई मतलब नहीं है। प्रधानाचार्यों की ओर से उपस्थिति प्रमाणित की जाएगी। फिर सभी का वेतन निकलेगा।
- देवेंद्र पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक