पिछले हफ्ते खूब लालबत्तियां बंटीं। माना जा रहा है कि ‘नेताजी’ ने जिसे कहा, पंचम तल से उसके लिए लालबत्ती लगी कार हाजिर हो गई।
राज्यमंत्री स्तर के ओहदे के नियुक्ति पत्र जारी हो गए। मुलायम हुए मन ने ऐसी नरमी दिखाई कि वेस्ट यूपी के एक जिले में एक दिन में तीन नेताओं को आम से खास बना दिया।
पहले कुछ लोग कहते थे कि नवाबों के जिले में एक लालबत्ती रह सकती है तो जंगे आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले जिले में क्यों नहीं।
एक दिन में तीन लालबत्ती मिलते ही कई नेताओं को सियासी गश आ गया। तीन बार के माननीय और ‘राज्यमंत्री’ को लोकसभा चुनाव लड़ाने वाली टीम तो मानो भौंचक रह गई।
एक नेता ने टेलीफोन पर कहा, बत्तियां चुनाव जिताने के लिए बंट रही हैं या हराने के लिए। उनकी आशंका है कि मुलायम मन का फैसला प्रत्याशी के लिए कठोर साबित न हो जाए।
हद तो तब हो गई जब एक जिम्मेदार नेता ने यहां तक टिप्पणी कर दी कि चुनाव लड़ने वाले विरोधी को ही लालबत्ती दे देते तो क्या हर्ज था? कितना अच्छा संदेश जाता!