एसआईटी जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने ग्राम विकास अधिकारी और समाज कल्याण पर्यवेक्षक के 1952 पदों के लिए वर्ष 2018 में कराई गई भर्ती परीक्षा निरस्त कर दी है। यही नहीं, सहायक बोरिंग टेक्नीशियन, शोध अधिकारी, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी, वन रक्षक एवं वन्य जीव रक्षक के पदों पर भर्ती की प्रस्तावित परीक्षा भी टाल दी गई है। इस संबंध में परीक्षा नियंत्रक दिनेश ने बुधवार को आदेश जारी कर दिया।
गौरतलब है कि दोनों संवर्ग के लिए वर्ष 2018 में 22 व 23 दिसंबर को परीक्षा कराई गई थी। परिणाम 28 अगस्त 2019 को घोषित किया गया था। योगी सरकार में यह पहली बड़ी भर्ती परीक्षा थी। इसमें करीब 9 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। सूत्रों के अनुसार यह वही भर्ती परीक्षा है, जिसके पहले अधीनस्थ के तत्कालीन अध्यक्ष सीबी पालीवाल ने इस्तीफा दे दिया था।
ओएमआर शीट के मिलान से सामने आई थी गड़बड़ी
इस परीक्षा के लिए तीन ओएमआर शीट तैयार कराई गई थी। एक आयोग, दूसरी कोषागार व तीसरी अभ्यर्थी के पास रहनी थी। मूल्यांकन कराया गया तो तमाम अभ्यर्थियों की आयोग व कोषागार की ओएमआर शीट के अंकों में अंतर था। इस पर मेरिट में आए 136 अभ्यर्थियों को बाहर करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। इसमें और गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई। प्रथम दृष्टया गड़बड़ियों की पुष्टि होने के बाद आयोग ने इसे निरस्त करने का फैसला किया है।