संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक पदों की भर्ती पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही साक्षात्कारों के परिणामों की घोषणा रोकने का भी निर्देश दिया है।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति राम नाईक ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में भर्तियों में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद यह फैसला किया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी संशोधित विनियमों को परिनियमावली में शामिल कर चयन प्रक्रिया दोबारा प्रारंभ की जाए।
शैक्षिक पदों पर भर्ती के लिए नए विज्ञापन जारी करते समय स्पष्ट उल्लेख किया जाए कि जिन अभ्यर्थियों ने पहले जारी विज्ञापन पर आवेदन किया गया था उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है।
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शैक्षिक पदों पर भर्ती में अनियमितता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राज्यपाल ने बैठक बुलाई थी। इसमें कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे, राज्यपाल के सचिव चंद्रप्रकाश, विशेष कार्याधिकारी डॉ. राजवीर सिंह राठौर एवं कुलपति के विशेष कार्याधिकारी राघवेंद्र मिश्र मौजूद थे।
8 अप्रैल 2017 को जारी शासनादेश के अनुसार नए नियमों को विश्वविद्यालय परिनियमावली में शामिल करने के बाद ही भर्ती करने के आदेश थे परंतु विश्वविद्यालय पुराने नियमों से ही भर्ती कर रहा था। जिसकी शिकायत राज्यपाल से की गई थी।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में कुलसचिव, वित्त अधिकारी, परीक्षा नियंत्रक, उपकुलसचिव, सहायक कुलसचिव जैसे रिक्त प्रशासनिक पदों पर भर्ती के लिए राज्यपाल सचिवालय द्वारा शासन स्तर पर कार्यवाही कराए जाने का आश्वासन दिया है।