सपा सरकार के कार्यकाल में जल निगम के विभिन्न संवर्गों में हुई भर्ती में व्यापक पैमाने पर अनियमितता बरते जाने की पुष्टि हुई है। विशेष जांच प्रकोष्ठ (एसआईटी) द्वारा अब तक की गई प्राथमिक जांच में सहायक अभियंता (एई) व अवर अभियंता (जेई) समेत सभी पदों पर की गई भर्ती में कई स्तरों पर गड़बड़ी सामने आई है।
इस संबंध में एसआईटी की जांच टीम ने सोमवार को जलनिगम के तत्कालीन एमडी पीके आशुदानी से कई घंटे तक पूछताछ की है। साथ ही एसआईटी ने अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट के बारे में शासन को अवगत भी करा दिया है।
एसआईटी के अपर पुलिस अधीक्षक मधुबन कुमार सिंह ने बताया कि अब तक की जांच में सहायक अभियंता, अवर अभियंता (विद्युत/यांत्रिक), नैतिक लिपिक और आशुलिपिक की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता बरते जाने की पुष्टि हुई है।
उन्होंने बताया कि 122 पदों पर सहायक अभियंताओं की भर्ती को खुद जल निगम ने रद्द कर दिया था। जबकि अवर अभियंता (सिविल) के 727 पदों और अवर अभियंता (विद्युत/यांत्रिक) के 126 पदों पर भर्ती के लिए अपनाई गई प्रक्रिया में भी अनियमितता के साक्ष्य हाथ लगे हैं।
उन्होंने बताया कि इसी तरह नैतिक लिपिक के 335 पदों पर की गई भर्ती की जांच अभी चल रही है। जबकि आशुलिपिक के 63 पदों पर भर्ती की भी प्रक्रिया की गई थी, जिसमें से 32 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। हालांकि जल निगम ने बिना कारण बताए ही आशुलिपिक की भर्ती को रद्द कर दिया था।
इसे शासकीय क्षति मानते हुए इस प्रकरण की भी जांच की जा रही है। एएसपी ने बताया कि इस मामले में अब तक भर्ती प्रक्रिया में शामिल रहे मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी अनिल कुमार खरे, प्रमोद कुमार सिन्हा, राजीव निगम, गिरीश चंद्र व राम सेवक शुक्ला आदि लोगों से पूछताछ का काम पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि भर्ती प्रक्रिया करने वाले एपटेक कंपनी से भी भर्ती के संबंध में दस्तावेज प्राप्त हो चुके हैं।