बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने मंगलवार को विधानसभा में ऐलान किया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशानुसार टीईटी पास अभ्यर्थियों की प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रिक्त पदों पर नियुक्ति की जाएगी।
हालांकि उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में थोड़ा विलंब जरूर हो सकता है। शिक्षामंत्री के अनुसार लोकसभा चुनाव के कारण दो महीने नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया बाधित रही। अब सभी डीएम व डायट प्राचार्यों को निर्देश भेजकर डाटा तैयार कराया जा रहा है।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने कहा है कि काम पूरा कराने में छह सप्ताह का वक्त लगेगा। इसके मद्देनजर सरकार ने कोर्ट से कुछ और समय मांगा है।
बसपा ने किया बहिर्गमन
सहायक अध्यापकों की नियुक्ति में हो रही देरी पर बसपा ने सरकार पर बेरोजगारों के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
भाजपा के सुरेश राणा के एक सवाल के जवाब में बेसिक शिक्षा मंत्री ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के 20 नवंबर 2013 के आदेश और सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी पर 25 मार्च 2014 को दिए गए अंतरिम आदेश के अनुपालन में 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है।
राणा ने अनुपूरक सवाल के जरिये जानना चाहा कि क्या सरकार ने इसकी कोई समयसीमा तय की है। चौधरी ने कहा कि सहायक अध्यापकों की नियुक्ति झंझट में है, इसलिए समय लग रहा है।
इसलिए हो रही है देरी
बेसिक शिक्षामंत्री ने तर्क दिया कि पिछली सरकार ने नियमावली बदल दी और टीईटी मेरिट बढ़ाने में धांधली और घूसखोरी हुई। कुछ कागज माध्यमिक शिक्षा विभाग के पास है, कुछ उनके विभाग के पास और कुछ कोर्ट में। चूंकि एनसीटीई को वक्त चाहिए इसलिए मजबूरी है।
उन्होंने कहा कि कोर्ट से भी थोड़ा समय मांगा गया है। नियुक्तियां होंगी, प्रक्रिया में थोड़ा वक्त लग सकता है। एनआईसी से साफ्टवेयर तैयार कराया जा रहा है।
इस पर नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 12 सप्ताह में नियुक्ति के आदेश दिए थे। इतना समय काफी था।
सरकार ने क्यों नहीं किया अभी कितना समय लगेगा? चौधरी ने इसमें आ रही कठिनाइयों का उल्लेख किया तो मौर्य और उनकी पार्टी के सदस्य यह आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए कि सरकार बेरोजगारों के साथ धोखा कर रही है। उन्हें ठगा जा रहा है।