केजीएमयू के संक्रामक रोग यूनिट प्रभारी डॉ. डी हिमांशु के अनुसार रिकवरी रेट व मृत्यु दर का आकलन करना जल्दबाजी होगा। लखनऊ में जो भी मरीज आए उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सुविधाएं दी गईं। रेफर हो करके आए कुछ मरीज हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज वाले थे, लेकिन सही रणनीति और तुरंत इलाज से उन्हें भी ठीक होने में कम समय लगा।
सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी देखनी होगी
लोहिया संस्थान के स्टेट नोडल अधिकारी कोराना व मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह का कहना है कि मरीज के सामाजिक-आर्थिक हालात का भी अहम रोल होता है। मरीजों का बैकग्राउंड, इलाज की तत्परता और इलाज मिलने की स्थिति पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। इसलिए ठीक होने की दर और मृत्यु दर का अभी तक कोई पुख्ता अध्ययन नहीं हो पाया है।