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लखनऊ में मरीजों के ठीक होने की दर सबसे ज्यादा, मृत्युदर भी सबसे कम

Mon, 11 May 2020 04:03 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : PTI
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कोरोना वायरस से जंग में लखनऊ की स्थिति यूपी के अन्य शहरों से कहीं बेहतर है। लखनऊ में मरीजों का रिकवरी रेट प्रदेश में सबसे ज्यादा 68.50 फीसदी है तो मृत्युदर भी सबसे कम 0.4 फीसदी है। वहीं, मुरादाबाद व मेरठ में मृत्युदर क्रमश: 5.83 व 5.1 फीसदी है, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा है।

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स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार लखनऊ में मिले 247 मरीजों में 165 ठीक हो चुके हैं, जबकि एक मरीज की मौत हुई है। 100 से ज्यादा मरीजों वाले जिलों के आंकड़े देखें तो मुरादाबाद और मेरठ में मृत्युदर सबसे ज्यादा है। दोनों जिलों में रिकवरी रेट क्रमश: 62.5 फीसदी व 33 फीसदी है।

रिकवरी रेट को भी देखें तो अलग-अलग ट्रेंड नजर आता है। आखिर ऐसा क्यों है? क्या ये आबोहवा का असर है? या इलाज की सही रणनीति और सक्रियता? इसे लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों के अलग-अलग तर्क हैं। ज्यादातर का यही कहना है कि जहां रहन-सहन और खानपान कमजोर होगा वहां मृत्यु दर अधिक होगी। तो कुछ का तर्क है कि मरीजों का कितना आंकड़ा है, उसपर भी बहुत कुछ निर्भर करता है।

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100 से ज्यादा संक्रमित वाले जिलों की स्थिति

जिले      रिकवरी रेट (फीसदी)   मृत्यु दर (फीसदी)
लखनऊ          66.80                      0.4
आगरा             36.9                        2.2
गौतबुद्धनगर    57.34                      0.46
मेरठ              33.16                       5.1

कानपुर नगर   17.34                      2.04
गाजियाबाद     44.44                     1.58
फिरोजाबाद    41.84                      2.17
मुरादाबाद      62.5                        5.83
(आंकड़े प्रदेश सरकार की ओर से शनिवार शाम जारी सूची के अनुसार)
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अभी आकलन करना जल्दबाजी

केजीएमयू के संक्रामक रोग यूनिट प्रभारी डॉ. डी हिमांशु के अनुसार रिकवरी रेट व मृत्यु दर का आकलन करना जल्दबाजी होगा। लखनऊ में जो भी मरीज आए उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सुविधाएं दी गईं। रेफर हो करके आए कुछ मरीज हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज वाले थे, लेकिन सही रणनीति और तुरंत इलाज से उन्हें भी ठीक होने में कम समय लगा।

सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी देखनी होगी
लोहिया संस्थान के स्टेट नोडल अधिकारी कोराना व मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह का कहना है कि मरीज के सामाजिक-आर्थिक हालात का भी अहम रोल होता है। मरीजों का बैकग्राउंड, इलाज की तत्परता और इलाज मिलने की स्थिति पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। इसलिए ठीक होने की दर और मृत्यु दर का अभी तक कोई पुख्ता अध्ययन नहीं हो पाया है।
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