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तिब्बत की गर्मी से यूपी में हो रही तबाही!

Sun, 05 Apr 2015 01:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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तिब्बत में बढ़ती गर्मी ने बीते एक-डेढ़ महीने में सूबे का मौसम असामान्य कर दिया है। पहले मार्च में बेमौसम रिकॉर्डतोड़ बारिश हुई। फिर अप्रैल में अवध में अंधड़, ब्रज क्षेत्र आगरा, मथुरा में औसत से बड़े साइज के ओले गिरे।
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आमतौर पर रबी की फसलों जैसे गेहूं, चना, सरसों आदि के लिए अमृत जैसी बारिश कराने वाला पश्चिमी विक्षोभ अचानक किसानों के लिए विलेन बन गया है तो इसके पीछे तिब्बत के पठार में बढ़ रही गर्मी को वजह माना जा रहा है।

दरअसल, इस क्षेत्र में मानवीय आबादी लगातार बढ़ रही है। विकास के लिए प्रकृति को दरकिनार कर दिया गया है। इससे यहां का मौसम लगातार गर्म हो रहा है और यह पश्चिमी विक्षोभ को आकर्षित कर रहा है। इसी के चलते उत्तर भारत में मौसम को तेवर बदला हुआ नजर आ रहा है।
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम), पुणे ने एक साल पहले यानी 2014 में अपने रिसर्च ‘चेंज इन वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ओवर वेस्टर्न हिमालय इन अ वार्मिंग एन्वायर्नमेंट’ में इसकी चेतावनी दी थी। आईआईटीएम ने कहा था, सर्दियों के बाद भी परेशान करेगा।

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से होगी बारिश और हिमपात

आईआईटीएम ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि सर्दियों में होने वाला वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का सिलसिला सर्दी के बाद भी जारी रह सकता है। कहा गया कि मौसम गर्म होने के कारण हल्के दबाव के चक्रवात भारत की ओर बढ़ेंगे।

आमतौर पर इन चक्रवातों को हिमालय रोक लेते हैं लेकिन जैसे-जैसे इनकी संख्या बढ़ती जाएगी, भारत में बारिश और हिमपात जैसी स्थितियां पैदा करेंगी।

आखिर क्या हैं पश्चिमी विक्षोभ
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस दरअसल ऐसे तूफान हैं जो सर्दियों के मौसम में भारत में उत्तर से आते हैं। ये तूफान भूमध्य सागर और अंध महासागर में जमा हुई नमी को तिब्बत से होते हुए हिमालय से टकराते हैं और जनवरी से मार्च मध्य के दौरान बारिश करते हैं।

इस बारिश का हिंद महासागर की नम हवाओं से आने वाले मानसून से दूर-दूर तक लेना-देना नहीं है। इन्हें एक्सट्रा ट्रॉपिकल साइक्लोन भी कहा जाता है।

गर्म और सर्द हवाओं से बनने वाला चक्रवात मचा रहा तबाही

इस पर आंचलिक विज्ञान केंद्र लखनऊ के डॉ. जेपी गुप्ता का कहना है, ‘गर्म और सर्द हवाओं से मिलकर बनने वाला एक्स्ट्रा ट्रॉपिकल साइक्लोन आमतौर पर जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड होते हुए आगे बढ़ जाता था।

इस साल यह हिमालयन क्षेत्र के साथ ही यूपी की तरफ बढ़ गया है। इससे मध्य और उत्तरी भारत में बार-बार बारिश, ओलावृष्टि हो रही है। आंधियां आ रही हैं। हालांकि प्रदेश में असामान्य मौसम को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। इसके लिए साइंटिफिक स्टडी की जरूरत है’।

भूमध्य सागर से उठा तूफान मचा रहा तबाही
बीएचयू के मौसम विज्ञानी और एग्रो मेट्रोलॉजी फील्ड यूनिट के हेड प्रो. आरएस सिंह कहते हैं कि भूमध्य सागर में बनने वाला एक्सट्रा ट्रॉपिकल साइक्लोन पहले जम्मू कश्मीर और हिमालय के ऊपर या तराई से होकर निकल जाते थे। इस बार वे लोअर एल्टीट्यू़ड की तरफ शिफ्ट हो गए हैं।
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मौसम चक्र में बदलाव से घटी-बढ़ी बारिश

आचार्य नरेन्द्र देव कृषि विवि, फैजाबाद के डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर मेट्रोलॉजी के हेड और एग्रो मेट्रोलॉजी फील्ड यूनिट (एएमएफयू) के प्रिंसिपल डॉ. पदमाकर त्रिपाठी कहते हैं कि मौसम में बदलाव 90 फीसदी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और 10 फीसदी चक्रवात के कारण है।

जिस साल बारिश कम होती होती है, उस साल पश्चिमी विक्षोभ बढ़ जाते हैं। पहले एक साल में 4-5 बार वेस्टर्न डिस्टर्बेंस होता था, अब इसकी फ्रिक्वेंसी दस बार हो गई है।

ये भी हुआ असर
पहाड़ों पर बारिश घट गई है।
राजस्थान में दोगुनी बारिश होने लगी।
चेरापूंजी में आधी वर्षा रह गई।

3 से 4 डिग्री सेंटीग्रेड नीचे गिरा तापमान
डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हार्टिकल्चर एडं फोरेस्ट्री, सोलन (हिमाचल प्रदेश) की कृषि मौसम विज्ञानी और जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ डॉ. परमिंदर कौर बवेजा के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वजह से पश्चिमी विक्षोभ अब आपदा का रूप ले रहे हैं।

हिमाचल ही नहीं उत्तरी भारत केसभी राज्यों में तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री सेंटीग्रेड नीचे चल रहा है। प्रकृति से छेड़छाड़ के चलते कहीं तापमान बढ़ रहा है तो कहीं जल स्तर।
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