महमूदाबाद सीट पर इस बार कांटे की टक्कर है। वैसे तो भाजपा और सपा प्रत्याशी के बीच सीधी लड़ाई मानी जा रही है। पर, बसपा यहां खेल कर सकती है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। सियासी पंडितों का भी कहना है कि बसपा जिस तरह से सेंध लगाने की कोशिशें कर रही है, अगर वह कामयाब रही तो मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है।
महमूदाबाद विधानसभा क्षेत्र कुर्मी बहुल इलाकों में आता है। मुस्लिम आबादी दूसरे नंबर पर है। विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा भाजपा और सपा में रहते हुए छह बार इस सीट पर जीत दर्ज कर चुके हैं। 2017 में मोदी लहर में भी सपा से मैदान में उतरे नरेंद्र वर्मा सीट पर कब्जा बरकरार रखने में कामयाब हुए थे। सपा सरकार में वे मंत्री भी बने थे। सपा ने फिर से उन्हें चुनावी दंगल में उतारा है, जबकि 2017 की मोदी लहर में सपा प्रत्याशी नरेंद्र वर्मा से महज 1906 वोटों से हारने वाली आशा मौर्या पर इस बार भी भाजपा ने दांव लगाया है। बसपा से चुनावी रण में मीसम अम्मार रिजवी ताल ठोक रहे हैं। वहीं, कांग्रेस ने ऊषा वर्मा को मैदान में उतारा है।