पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी।
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एक चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी ने लोगों से पाजामा पहनाने की खूब गुहार लगाई थी। कुछ लोग हंसते हैं कि अटल लोगों से पाजामा क्यों मांगेंगे। पर, यह बात सोलह आना सच है। अटल जी भाषण कला के महारथी तो थे ही और कैसे अपनी बात कहनी है इसे भी बखूबी समझते थे।
बात 1991 की है। अटल जी लखनऊ से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे। उस समय बख्शी का तालाब नाम से विधानसभा क्षेत्र नहीं था। तब इसका नाम महोना था। महोना के कुम्हरावां गांव में अटल की सभा थी। अटल बोले, ‘भाइयों और बहनों! सिर्फ कुर्ता न पहनाना। पाजामा भी जरूर पहना देना। सोचो! कुर्ता पहने कोई आदमी पाजामा बिना कैसा लगेगा।
दरअसल, उस समय लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ हो रहा था। यह बताने की जरूरत तो है नहीं कि अटल के कंधों पर ही भाजपा को जिताने की जिम्मेदारी थी। उन्होंने कुम्हरावां की सभा में कहा, ‘मेरे साथ विधानसभा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार को भूल न जाना। यह तो वही होगा जैसे किसी को कुर्ता पहना दिया और धोती या पाजामा पहनाना भूल गए।
सोचो! सिर्फ मुझे कुर्ता पहनाकर भेज दोगे और धोती या पाजामा नहीं पहनाओगे तो कैसा लगूंगा।’ लोग खिलखिलाकर हंस पड़े। अटल ने फिर चुटकी लेते हुए कहा, ‘अरे भाई! मैं यहां से चुनाव लड़ रहा हूं। आप सब घर वाले हो। हंस लो लेकिन बिना धोती या पाजामा पहनाए दिल्ली भेजकर देशभर में हंसी न कराना।’