- पुआल की गांठ बनाने के लिए बेलर व अन्य उपकरण की खरीद में केंद्र के अनुदान के साथ राज्य अलग से अनुदान बढ़ाएगा। केंद्र मशीनरी पर कीमत का 40 प्रतिशत अनुदान देता है। 40 प्रतिशत अनुदान राज्य सरकार की ओर से दिया जाएगा। इससे किसानों को उपकरण 80 प्रतिशत अनुदान पर मिल सकेगा।
- किसानों को केंद्र की योजना के अंतर्गत क्षमता से अधिक क्षमता के बेलर खरीदने की अनुमति दी जाएगी। यह 3 गुना अधिक क्षमता तक हो सकेगी।
- निजी उद्यमी भी यदि व्यक्तिगत तौर पर पुआल की आपूर्ति करना चाहेंगे तो उन्हें भी इसका लाभ मिल सकेगा।
- गोबर की आपूर्ति निकटवर्ती गौशालाओं से होगी जिसमें एफपीओ की मदद ली जाएगी।
केले का तना व गन्ने के पत्ते से भी कमाएंगे किसान
किसानों ने बताया कि कुशीनगर व गोरखपुर के आसपास 8 से 10 हजार हेक्टेयर केले की खेती होती है। इसके तने को भी कच्चे माल के तौर पर उपयोग किया जा सकता है। इसी तरह बड़े क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है। उसकी पत्तियां भी उपयोगी हो सकती है। आईओसी के अफसरों ने केले के तने व गन्ने की पत्तियों का सैम्पल भेजने का निर्देश दिया। कहा, यदि लैब से उपयोगिता साबित हुई तो इसका भी उपयोग किया जाएगा।