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सावधान... लखनऊ में बढ़ गई संक्रमण की दर, बचाव में कतई न करें लापरवाही

Mon, 06 Jul 2020 10:27 AM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ में पिछले 15 दिनों में मरीजों के मिलने की रफ्तार ढाई फीसदी तक बढ़ गई है। जबकि मरीजों के ठीक होने की दर 62 फीसदी से घटकर 59 फीसदी पर आ गई है। बढ़ती मरीजों की संख्या ने स्वास्थ्य विभाग को भी चिंता में डाल दिया है। पिछले दो दिनों में मरीजों के इलाज के लिए हज हाउस और शिल्पग्राम में 1000-1000 बेड के इंतजाम किए गए हैं। वहीं आने वाले 15 दिनों में 5000 और बेड का इंतजाम करने की तैयारी है। 
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क्योंकि...मरीज बढ़ रहे, डिस्चार्ज कम हो रहे, 90 फीसदी बेड फुल
राजधानी में 2038 बेड कोरोना के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें से 90 फीसदी बेड फुल हैं। भर्ती  मरीजों में लखनऊ में आने के बाद पॉजिटिव पाए गए मरीजों के अलावा कोरोना के ऐसे मरीज भी हैं जो दूसरे जिलों से  गंभीर अवस्था में एसजीपीजीआई, केजीएमयू और लोहिया संस्थान रोजाना रेफर होकर आ रहे हैं। 

15 मई तक मरीजों के मिलने की दर 

2.88 फीसदी थी...और आज 7.90
1 से 15 मई के बीच लिए गए कुल सैंपल में पॉजिटिव पाए जाने वालों की संख्या 2.88 फीसदी रही। 16 से 31 मई के बीच मरीजों के मिलने की दर 4.89 फीसदी रही तो 1 से 15 जून के बीच 5.46 तो 16 से 30 जून के बीच 6.70 पहुंच गई।  पर, 1 से 5 जुलाई के बीच यह आंकड़ा 7.90 फीसदी पर पहुंच गया। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि राजधानी में पूरे प्रदेश से सर्वाधिक सैंपल लिए गए हैं। इस वजह से यहां पॉजिटिव मरीजों की संख्या अधिक है। पर, कुल सैंपल की अपेक्षा मरीजों के मिलने का ग्राफ  देखें तो उसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जुलाई के 5 दिन की बात करें तो 234 मरीज मिल चुके हैं।

...और डिस्चार्ज होने वालों का प्रतिशत घट रहा
 अब तक राजधानी में 800 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। पर, डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की दर देखें तो 15 मई के आसपास यह आंकड़ा 77 फीसदी रहा। 31 मई तक यह आंकड़ा 77 फीसदी तक ही रहा। 15 से 30 जून के बीच यह दर घटकर 62 फीसदी पर पहुंच गई। 5 जुलाई की बात करें तो यह दर और घटकर 59 फीसदी पर पहुंच गई है।
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हर तहसील में एक-एक इंस्टीट्यूट को दिया जाएगा अस्पताल का रूप

मरीजों की बढ़ती संख्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग कितना तैयार है, इस सवाल पर सीएमओ डॉक्टर नरेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि 2000 बेड का इंतजाम कर लिया गया है। अगले 15 दिन में 5000 और बेड का इंतजाम किया जाएगा।  ये बेड निजी इंस्टीट्यूट्स में लगाए जाएंगे। प्रयास है कि हर तहसील में एक-एक इंस्टीट्यूट को अस्पताल के रूप में तब्दील कर दिया जाए। इनमें संबंधित इलाके के मरीजों को रखा जाएगा। जिन मरीजों को ज्यादा दिक्कत होगी उन्हें लेवल-2 हॉस्पिटल में भेजा जाएगा।

निजी अस्पतालों का किया जाएगा अधिग्रहण
सीएमओ डॉ. अग्रवाल दावा करते हैं कि इसी गति से मरीज मिलते रहे तो भी 1 से 2 महीने तक का इंतजाम मुकम्मल कर लिया गया है। जहां तक निजी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों का सवाल है तो जरूरत पड़ने पर उनका अधिग्रहण किया जा सकता है। हालांकि अभी तक किसी निजी अस्पताल में कोरोना का इलाज नहीं किया जा रहा है। 
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