डॉ. अंशुमान पांडे
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फाइलेरिया नाम सुनते ही हाथी पैर की तस्वीर जेहन में कौंध जाती है। पर, कोई कहे कि पेट में फाइलेरिया तो शायद यह बात गले न उतरे। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के गैस्ट्रो सर्जरी के डॉक्टरों की टीम एक ऑपरेशन के दौरान चौंकी।
शक कैंसर की ओर था, पर सर्जरी शुरू हुई तो पता चला कि कुछ और है। मामला फाइलेरिया का सामने आया। डॉक्टरों का दावा है कि देश में इस तरह की पहली सर्जरी है। यह सर्जरी यूरोप के इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इन्फेक्शस डिजीज में प्रकाशित हुई है।
केस स्टडी : गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अंशुमान बताते हैं बाराबंकी की 28 वर्षीय एक महिला असहनीय पेट दर्द और बुखार से पीड़ित थी। यह सिलसिला तीन महीने से चल रहा था। पित्त जैसी उल्टियां होतीं।
उसे पीलिया नहीं था। पेट का सीटी स्कैन कराया गया तो उसमें गॉल ब्लैडर के बगल में पानी की झिल्ली दिखाई दी। ऐसा कुछ नहीं दिखा, जिससे स्पष्ट हो कि मरीज को कैंसर है। इस तरह का ये केस अपने आप में अजूबा था जिसे मेडिकल की भाषा में ‘इंफेस्टेशन ऑफ लिवर’ कहा जाता है।
लिवर में सिस्टिक लेजन में पाया गया। ये बहुत दुर्लभ बीमारी थी जिसमें मरीज को परेशानी तो थी लेकिन कैंसर का लक्षण नहीं था। डॉ. अंशुमान के मुताबिक मरीज अभी भी संस्थान में फॉलोअप के लिए आता है। ऑपरेशन के बाद उसे कीमोथेरेपी की भी कोई जरूरत नहीं पड़ी थी।