रमजान समानता और सब्र का पैगाम देता है। आपसी भाईचारा और सब्र दूसरों की मदद का जज्बा पैदा करता है।
इसी जज्बे के साथ शुक्रवार को मस्जिदों और दरगाहों में रमजान के पहले जुमा की नमाज अदा की गई। इसके साथ ही दुनिया में बढ़ रहे जुल्म के खात्मे के लिए प्रार्थना की गई।
ऐशबाग ईदगाह इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने जुमा की नमाज से पूर्व माहे रमजान के पैगाम को बांटते हुए कहा कि रमजान खुलूस व सब्र का नाम है।
अल्लाह का यह पाक महीना इंसान को इंसान के काम आने और दूसरों की मदद की सीख देता है।
आतंकी इस्लाम विरोधी ताकते हैं
उधर, आसफी मस्जिद में मौलाना कल्बे जव्वाद ने रमजान के पहले शुक्रवार को नमाज अदा कराते हुए कहा कि इराक में दहशतगर्दी पर बात कही।
उन्होंने कहा कि आतंकियों को अमेरिका व इजराइल समर्थन दे रहा है इसके साथ ही इनके साथ इस्लाम विरोधी ताकतें जैसे सऊदी अरब भी शामिल है जो रसूल के दीन को मिटा कर नया इस्लामी तहरीक चलाना चाहता है।
इसी क्रम में टीले वाली मस्जिद में मौलाना फजलुर्रहमान वाजयी नदवी और नदवा कॉलेज में मौलाना सईदुर्रहमान आजमी ने जुमा की नमाज अदा कराई।
उलमा ने दिया नेक अमल का पैगाम
रमजानुल मुबारक अल्लाह के पाक महीने में हर नेक अमल को इबादत का दर्जा है। अगर इंसान आंखें बंद कर आराम करे या सो जाए तो वे पल भी अल्लाह इबादत में शुमार कर लेता है।
यह सिर्फ किसी एक जाति धर्म के लिए नहीं बल्कि आलम ए इंसानियत के लिए पैगाम ए इलाही है। शुक्रवार को यही संदेश देते हुए उलमा ने दरगाहों व मस्जिदों में दर्स ए कुरान व तरावीह में लोगों को नेक अमल करने के लिए प्रेरित किया।
दर्स देते हुए मौलाना नुसरत ने कहा कि रमजानुल मुबारक का एक-एक पल इबादत है इसमें रोजेदार ही नहीं बगैर रोजेदार भी अपने कर्मों से नेकियां हासिल कर सकता है।