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खपत न हो तो भी हर माह देना होगा 600 रुपये

Sat, 05 Jul 2014 11:24 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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एक तो पहले से ही बिजली की किल्लत ऊपर से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डालकर पावर कार्पोरेशन जनता के लिए और भी मुश्किलें खड़ी करना चाहता है।
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शहरी कॉमर्शियल उपभोक्ता भले ही बिजली कम खर्च करें लेकिन उन्हें हर महीने कम से कम 600 रुपये बिल चुकाना ही पड़ सकता है।

पावर कॉर्पोरेशन ने इन पर न्यूनतम उपभोग गारंटी चार्ज (एमसीजी) लगाने के लिए बृहस्पतिवार को राज्य विद्युत नियामक आयोग में गुपचुप तरीके से याचिका दायर की है।

कॉर्पोरेशन ने यह नया प्रस्ताव तब दाखिल किया जबकि आयोग ने टैरिफ प्रस्ताव को मंजूर कर उस पर कार्यवाही शुरू कर दी है।

याचिका में इन शर्तों का उल्लेख

चेयरमैन संजय अग्रवाल की ओर से दाखिल की गई याचिका में अनुरोध किया गया है कि वर्ष 2014-15 में जिन कॉमर्शियल उपभोक्ताओं द्वारा पहले तीन महीने में 1800 रुपये प्रति किलोवाट से कम बिल अदा किया जाता है तो बाकी बचे नौ महीनों में 600 रुपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह की दर से एमसीजी का प्रावधान किया जाए।

पावर कॉर्पोरेशन चाहता है कि वाणिज्यिक उपभोक्ताओं से हर महीने कम से कम 600 रुपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह की दर से बिजली बिल की वसूली की जाए भले ही वह कम बिजली खर्च करे।

सूत्रों का कहना है कि कानूनन आयोग द्वारा टैरिफ प्रस्ताव स्वीकार करके दरों के निर्धारण की कार्रवाई शुरू कर दिए जाने के बाद इस तरह की याचिका दायर नहीं की जा सकती।

कॉर्पोरेशन ने आयोग से अनुरोध किया है कि इसे भी टैरिफ प्रस्ताव का हिस्सा मानते हुए जनसुनवाई में रायशुमारी करके लागू करने पर विचार किया जाए।

राज्य विद्युत उपभोक्ता ने की खारिज करने की मांग

उपभोक्ता परिषद ने दाखिल किया जनहित प्रत्यावेदन पावर कॉर्पोरेशन की एमसीजी लगाने की याचिका के खिलाफ राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की ओर से शुक्रवार को प्रत्यावेदन दाखिल करके इसे खारिज करने की मांग की है।

परिषद ने इसे ऊर्जा संरक्षण अधिनियम का भी खुला उल्लंघन करार दिया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि कॉर्पोरेशन गुपचुप तरीके से मीटरयुक्त वाणिज्यिक उपभोक्ताओं पर एमसीजी लगाने के लिए दाखिल याचिका असंवैधानिक है।

जब बिजली दर का प्रस्ताव समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुका है और सुनवाई शुरू हो गई है तो ऐसे में किसी भी श्रेणी में कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता।
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पहले भी दाखिल हुई इस तरह की याचिका

इसी तरह का प्रस्ताव 2012-13 में ग्रामीण उपभोक्ताओं की श्रेणी के लिए दाखिल किया गया था जिसे आयोग ने नियमों के विपरीत बताते हुए खारिज कर दिया था।

उन्होंने कहा कि यह छोटे वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को समाप्त करने की साजिश है।

आयोग के झुग्गी-झोपड़ी व पटरी दुकानदार के लिए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया आसान करने के लिए कानून में बदलाव करने की घोषणा के तुरंत बाद कॉर्पोरेशन ने यह प्रस्ताव दाखिल करके साबित कर दिया है कि वह गरीब पटरी दुकानदारों को बिजली नहीं देना चाहता।
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