लखनऊ। असम चुनाव के दौरान शहर में 10 दिन तक घरों से कूड़ा उठान की व्यवस्था ध्वस्त रहने के बाद अब सड़क और गलियों की सफाई व्यवस्था भी पटरी से उतरने की आशंका है। विरोध के बावजूद रामकी कंपनी को तीन और वार्डों की सफाई का काम सौंप दिया गया है।
फरवरी में रामकी को छह वार्डों की सफाई का काम दिया गया था, पर वहां के पार्षद कंपनी के काम से संतुष्ट नहीं हैं। 15 अप्रैल को हुई नगर निगम सदन की बैठक में भाजपा पार्षद मुन्ना मिश्रा और भृगुनाथ शुक्ला सहित कई पार्षदों ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब कंपनी कूड़ा संग्रह का काम सही से नहीं कर रही, तो उसे और काम क्यों दिया जाए।
सदन में यह भी बताया गया कि बीते दिनों कंपनी के करीब 900 कर्मचारी असम चुनाव में चले गए थे। इससे शहर के 77 वार्डों में कूड़ा उठान व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी। आठ-आठ दिन तक घरों में कूड़ा सड़ता रहा। कंपनी को पता था कि कर्मचारी मतदान के लिए असम जाएंगे। इसके बाद भी कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए थे।
सफाई व्यवस्था पर चिंता
भाजपा पार्षद प्रमोद राजन ने किसी एक कंपनी को पूरी सफाई व्यवस्था देने को गलत बताया। उन्होंने कहा कि इससे असम चुनाव के समय जैसी स्थिति फिर पैदा हो सकती है। पहले कंपनी के कर्मचारियों के चले जाने से घरों से कूड़ा नहीं उठा था। अब वार्डों की सफाई भी एक ही कंपनी को देने से ऐसी ही समस्या किसी भी दिन आ सकती है।
नए वार्डों में काम और पार्षदों की राय
पार्षद शैलेंद्र वर्मा ने कहा कि कंपनी को काम देना मजबूरी थी, क्योंकि विभूति खंड और विराज खंड से कर्मचारी हटा दिए गए थे। गाड़ियां भी कम थीं। उन्होंने कहा कि यदि तीन महीने में काम सही नहीं हुआ तो कंपनी को हटा दिया जाएगा।
फरवरी इन वार्डों में काम कर रही कंपनी
जगदीश चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई, लालकुआं, महात्मा गांधी जियामऊ, गोलागंज वार्ड, बाबू बनारसी दास।
अब ये बढ़े तीन नए वार्ड
मौलवीगंज, विवेकानंदपुरी, चिनहट द्वितीय।
शहर में पड़ा कूड़ा।