जगद्गुरु रामभद्राचार्य कहते हैं ‘पता नहीं नेता जी मुलायम सिंह यादव को क्या हो गया। जो एकदम से बदल गए। जब संतों का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला था तब तो हम लोगों ने उनकी सारी शंकाओं का समाधान कर दिया था।
उनकी तरफ से यह सवाल आया था कि कुछ संत इस परिक्रमा को शास्त्र सम्मत नहीं बता रहे हैं। हमारी तरफ से तर्क सहित यह बात स्पष्ट कर दी गई थी कि परिक्रमा नई परंपरा नहीं है। यह शास्त्र के विरुद्ध भी नहीं है।
इसके बाद उन्होंने सहमति दे दी थी। पर, बाद में बदल गए। मुख्यमंत्री अखिलेश का कोई दोष नहीं है। वह भीतर-बाहर एक हैं। पूरी तरह निर्दोष हैं। पर, अपने अंकलों का क्या करें? बेचारे दबाव में आ गए।’
वैसे अखिलेश से बदलाव की उम्मीद है। उन्हें अपने अंकल लोगों के दबाव से मुक्त होने की कोशिश करनी चाहिए।
परिक्रमा के सिलसिले में नजरबंदी से सोमवार को मुक्ति पाए स्वामी रामभद्राचार्य मंगलवार को यहां कुछ पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जो कथित संत परिक्रमा की वैधानिकता पर सवाल खड़ा कर रहे हैं, उनसे वह शास्त्रार्थ को तैयार हैं। इस सवाल पर कि मंदिर मुद्दे पर 1990 व 1992 जैसा उत्साह क्यों नहीं दिखा?
वह कहते हैं कि 1990 में मंदिर निर्माण को कारसेवा होनी थी। वर्ष 1992 में भी यही लक्ष्य था। अब वहां कोई ढांचा तो है नहीं।
फिर इस बार लोगों को यह बताने के लिए संतों की परिक्रमा होनी थी कि न्यायालय के आदेश के बावजूद राजनेता इस मामले को लटकाए रखना चाहते हैं। अयोध्या में जनसमूह एकत्र करना मुद्दा ही नहीं था।
पर ऐसा माहौल बना दिया गया कि जैसे संत कहीं हमला करने जा रहे हों। वास्तविक स्थिति समझने की कोशिश किए बगैर तनावपूर्ण माहौल बना दिया गया।
मुलायम को ऐसी भाषा नहीं बोलनी चाहिए
कहा कि परिक्रमा विहिप का नहीं संतों का कार्यक्रम था। संत समाज मुलायम को शिष्ट राजनेता मानता है। इसलिए उनके मुंह से गुंडा और गुंडई जैसे शब्द ठीक नहीं लगते।
संत मर्यादा नहीं तोड़ेंगे। संतों को सरकार से कोई शिकायत नहीं है। मंदिर निर्माण आज नहीं तो कल हो ही जाएगा। जिसे कोई नहीं रोक सकता।