फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रमजान में डेढ़ पारे की तरावीह का मस्जिदों में करें इंतजाम, नाइट कर्फ्यू को देखते हुए मौलाना खालिद ने जारी की एडवाइजरी

Fri, 09 Apr 2021 12:03 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
विज्ञापन
मौलान खालिद रशीद फरंगी महली - फोटो : एएनआई
विज्ञापन
कोरोना के बढ़ते मामले और नाइट कर्फ्यू लगने के बाद रमजान में डेढ़ पारे की तरावीह की नमाज का इंतजाम किया जाए, ताकि नमाज में शामिल लोग नाइट कर्फ्यू लगने से पहले अपने घरों को पहुच जाएं। इस्लामिक सेन्टर आफ इण्डिया फरंगी महल के चेयरमैन मौलाना मौलान खालिद रशीद फरंगी महली ने रमजान और नमाज को लेकर एडवाइजरी जारी की है। 
विज्ञापन


इसमें नाइट कर्फ्यू और कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए इबादत करने की सलाह दी गई है। मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि इस साल रमजान का चांद 12 अप्रैल को दिखेगा। अगर चांद दिख जाता है तो पहला रोज़ा 13 अप्रैल को होगा, नहीं तो 14 अप्रैल को होगा। कोरोना के मामले बढ़ रहे है इसलिए सभी से अनुरोध है कि रमज़ान में कोविड प्रोटोकॉल का ध्यान रखें।

ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि कोरोना महामारी और नाइट कर्फ्यू को देखते हुए रमजानुल मुबारक में कोविड नियमों का पालन करते हुए इबादत करें 
विज्ञापन


कई शहरों में नाइट कर्फ्यू होने की वजह से रमजान में तरावीह की नमाज डेढ़ पारे से ज़्यादा न पढ़ी जाए, ताकि 9 बजे तक सभी अपने घर वापस चले जाएं। एक वक्त में किसी भी मस्जिद में 100 से अधिक लोग न हो और इसी तरह इफ्तार में भी 100 से अधिक लोग जमा न हों। साथ कोरोना के खात्मे के लिए भी दुआ करें।

विज्ञापन

रमजान में इस एडवायजरी का करें पालन 

रमजान में भी कोविड प्रोटोकॉल पर पूरी तरह से अमल किया जाए।
रमजान के रोजे़ फर्ज हैं, इसलिए सारे मुसलमान रोजे जरूर रखें।
तरावीह जो रमजान में सुन्नत मुअक्किदा है उसका एहतिमाम जरूर करें।
मस्जिदों में तरावीह में डेढ़ पारे ही पढ़े जायें जिससे कि नमाजी नाइट कर्फ्यू शुरू होने से पहले अपने अपने घर पहुंच जाए।
मस्जिद में 100 से अधिक लोग एकत्रित न हों।
मस्जिद में भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा जाए।
सेहरी के समय जगाने के लिए लाउडस्पीकर का प्रयोग न किया जाए और न ही शोर किया जाए।
इफ्तार में भी 100 से अधिक लोग जमा न हों।
रमजान में विशेषकर इफ्तार के समय इस बीमारी के अन्त के लिए दुआ जरूर करें।
जो लोग हर साल मस्जिद में गरीबों के लिए इफ्तारी का आयोजन करते थे वह लोग इस साल भी करें।
जो लोग हर साल रमजान में इफ्तार पार्टियॉ करते थे वह इसी रकम को या इसका राशन गरीबों को दे दें।
जिन लोगों पर जकात फर्ज है वह जकात जरूर अदा करें।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें