एसआईटी चंपत राय, गोपाल राव समेत राममंदिर ट्रस्ट के कई अन्य पदाधिकारियों व उनसे जुड़े लोगों से गहनता से पूछताछ कर रही है। सूत्रों के मुताबिक ये लोग कई सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे हैं। कई सवालों के गोलमोल जवाब दे रहे हैं। वहीं, दान के दिए गए रिकॉर्ड से भी एसआईटी संतुष्ट नहीं है क्योंकि उसमें भी कई चीजें अस्पष्ट हैं। इसलिए एसआईटी को जांच में अधिक समय लग रहा है। विशेष जांच दल ने पूछताछ के लिए करीब दो सौ लोगों की सूची तैयार की है। इनमें से सवा सौ लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इनमें से कुछ से कई बार पूछताछ की है।
पकड़े गए पांच संदिग्धों से भी एसआईटी ने पूछताछ की है। उनके पास से रकम भी बरामद हुई थी। सूत्रों के मुताबिक इन संदिग्धों ने कई नामों का खुलासा किया है जिनको इस खेल में शामिल बताया है। जांच टीम अब इनके बयानों की तस्दीक कर रही है। अब सवाल है कि क्या एसआईटी की जांच के बीच एफआईआर दर्ज कराई जाएगी या जांच पूरी होने के बाद। इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई भी जाएगी या नहीं...ये सवाल अभी बना हुआ है।
बैंक की भी लापरवाही आ रही सामने
दान राशि की गिनती प्रक्रिया में बैंक की अहम भूमिका रहती थी। बैंक कर्मियों की मौजूदगी में ही गिनती होती थी। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की शुरुआती जांच में बैंक की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रक्रिया में उनकी भूमिका भी संदिग्ध है। हालांकि, जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक बैंक कर्मी ट्रस्ट के पदाधिकारियों के दबाव में रहते थे इसलिए वह हस्तक्षेप नहीं कर पाते थे।
टिन्नू ने अनिल मिश्रा का लिया नाम
आखिरकार एसआईटी ने तीसरे दिन टिन्नू यादव से लंबी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने उसके कार्य के बारे में पूछा, खासकर दान की राशि गणना में उसकी क्या भूमिका रहती थी। टिन्नू सीधे तौर पर अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इन्कार करता रहा। वह बोला, उसने कोई गबन चोरी नहीं किया है। वह सिर्फ मंदिर की अन्य व्यवस्थाओं को देखता था। इस दौरान उसने ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा का नाम लेते हुए उनकी जिम्मेदारी बताई। साथ ही तीन गणना इंचार्जों का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हीं लोगों की जिम्मेदारी दान की राशि की गणना की रहती थी। सूत्रों का कहना है कि टिन्नू से अभी आगे भी पूछताछ हो सकती है।