आशीष ने बताया कि नया मंदिर अब 360 फीट लंबा, 235 फीट चौड़ा और 161 फीट ऊंचा बनाने को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसका कुल क्षेत्रफल अब 84 हजार 600 वर्ग फीट होगा, जो पुराने मॉडल से प्रस्तावित मंदिर से बहुत बड़ा और भव्य है। पहले 268 फीट 5 इंच लंबाई, 140 फीट चौड़ाई और 128 फीट ऊंचाई के साथ कुल क्षेत्रफल 37 हजार 590 वर्ग फीट था।
पहले तीन गुंबद को बढ़ाकर पांच गुंबद करने से मंदिर में तीन बड़े बदलाव हुए हैं। पहले अग्रभाग, सिंहद्वार, नृत्यमंडप, रंगमंडप के बाद गर्भगृह था, अब गर्भगृह और रंगमंडप के बीच गूढ़ मंडप बनेगा, और इसके दाएं-बाए अलग-अलग कीर्तन व प्रार्थना मंडप होगा। गर्भगृह को छोड़ बाकी सभी मंडप के आकार काफी बढ़ गए हैं। पहले पिंक स्टोन के 12 फीट फाउंडेशन के बाद गर्भगृह के फ्लोर पर सिर्फ रामलला विराजमान होंगे।
उसके ऊपर वाले तल पर रामदरबार बनेगा, मंदिर की ऊंचाई बढ़ने से तीसरा तल बनेगा, जो खाली रहेगा। आशीष ने कहा कि डिजाइन तैयार होने के बाद इसी अनुपात में अब पत्थरों का कैलकुलेशन हो रहा है। नींव की गहराई तय होते ही इसके लिए भी अलग से पत्थरों की माप तय होगी।
हमारे लिए यह गौरवपूर्ण क्षण
- आशीष सोमपुरा बेहद भावुक होकर कहते हैं कि हम दोनों भाइयों को लिए यह गौरवपूर्ण और राम की विशेष कृपा प्राप्त करने का क्षण है। पद्मश्री दादा प्रभाशंकर सोमपुरा ने आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर का डिजाइन तैयार किया था, पिता चंद्रकांत सोमपुरा ने अक्षरधाम मंदिर की डिजाइन बनाई। अब हम और निखिल दोनों पिता के सानिध्य में राममंदिर की डिजाइन बनाने का आशीर्वाद स्वयं प्रभु राम के आशीर्वाद से मिला है।
‘श्रीरामजन्मभूमि मंदिर होगा नाम’
अयोध्या में 500 साल के संघर्ष और कई पीढ़ियों की शहादत के बाद अब श्रीरामजन्मभूमि पर मंदिर बनाने का क्षण आया है। रामलला की जन्मभूमि पर बनने के कारण इस मंदिर का नाम श्रीरामजन्मभूमि मंदिर के नाम से जाना जाएगा।
-चंपत राय, महासचिव श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट