मामूली कर्मचारी टिन्नू यादव का गणना प्रक्रिया में सबसे अहम जिम्मेदारी दी गई थी। यहां तक कि दान पात्रों की चाबियां उसके पास रहती थी। वहीं जिस कमरे में गिनती होती थी वहां की भी चाबी उसके पास रहती थी।
ट्रस्ट में कुल 14 पदाधिकारी (पदेन मिलाकर) हैं। सवाल उठता है कि आखिर अन्य सदस्यों ने इसमें दखल क्यों नहीं दिया। उनका हस्ताक्षेप न करना दो तीन पदाधिकारियों के लिए संजीवनी बन गया। चंपत राय, अनिल मिश्र व गोपाल राव जो करते रहे वह होता गया। क्योंकि कई मामले पहले भी सामने आए, अगर उसी समय सख्ती की जाती तो शायद ऐसी नौबत नहीं आती।
निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी कह चुके हैं कि गाइडलाइन का सिर्फ दस फीसदी ही पालन हुआ। अगर ऐसा हुआ तो अन्य पदाधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि व्यवस्था में दखल देते। जिससे उसको सुधारा जाता लेकिन ऐसा नहीं किया गया। हालांकि अब चर्चा है कि जिन पर सवाल उठे हैं उनसे पूरी जिम्मेदारी ले ली गई है। डीएम अयोध्या की निगरानी में प्रबंधन काम कर रहा है। गणना की विशेष निगरानी की जा रही है। जिससे किसी तरह की गड़बड़ियां न हों।