एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। उसी में टिन्नू यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प, लवकुश, मनीष, अविनाश, करुणेश और रमाशंकर की भूमिका का जिक्र था। इसलिए ये सभी आरोपी बनाए गए थे। अनिल के नाम का भी जिक्र था, लेकिन एफआईआर में उनको शामिल नहीं किया गया था। अज्ञात आरोपी बनाए गए हैं। सूत्र बताते हैं कि अब एसआईटी की विस्तृत जांच के बाद अज्ञात में कई नाम खुल सकते हैं। इसमें अनिल मिश्रा से लेकर बैंक के अधिकारी व कर्मी शामिल हो सकते हैं। हालांकि पुलिस ने भी कइयों के खिलाफ पुख्ता सुबूत जुटाए हैं।
चढ़ावा चोरी में चंपत राय का इस्तीफा हुआ। ट्रस्ट ने उसे स्वीकार कर लिया है। सूत्रों का कहना है कि चंपत पर यही अधिकतम कार्रवाई है। उनका ट्रस्ट से अलग होना ही सबसे बड़ी कार्रवाई है। कानूनी शिकंजा कसने की संभावना नहीं है। क्योंकि एसआईटी ने भी मामले में संलिप्तता या मिलीभगत का जिक्र न तो प्रारंभिक जांच में किया था और न ही विस्तृत जांच में। वह ट्रस्ट के जिम्मेदार थे, इसलिए उनकी जिम्मेदारी लापरवाही बरतने में तय की गई है। उसी का दोषी पाया गया।
एसआईटी की विस्तृत जांच करने की तारीख 15 जुलाई थी, जो बीत चुकी है। इसके बाद अब रिपोर्ट शासन को सौंपी जानी है। पहले यह बताया जा रहा था कि इस हफ्ते रिपोर्ट सौंप दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं, कुछ ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि एसआईटी ने थोड़ा समय मांगा है। उसके बाद यह रिपोर्ट कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेश की जाएगी। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं है। सीधे कोर्ट में रिपोर्ट सौंपने की बात सिर्फ चर्चा ही लग रही है। अब देखना होगा कि रिपोर्ट कब और किसे सौंपी जाएगी। एसआईटी से जुड़े अफसर इसको लेकर कुछ नहीं बोल रहे हैं।
गणना प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो इसको लेकर एसआईटी ने विस्तृत जांच में कई अहम सिफारिशें की हैं। अब गणना में जो बैंक कर्मी लगाए जाएंगे वह नियमित कर्मचारी होंगे। वहीं इनकी ड्यूटी बदलती रहेगी। हर पंद्रह दिनों में इन कर्मचारियों को बदला जाएगा। बैंक की तरफ से निगरानी के लिए एक अधिकारी भी तैनात होगा। एसआईटी ने इसके अलावा भी कई अहम सिफारिशें की हैं। जो जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद लागू की जाएंगी।
चढ़ावा चोरी की घटना में जो छह गणना कर्मी जेल गए हैं वह लिखापढ़ी में हाउसकीपिंग के कार्य के लिए भर्ती किए गए थे गणना की ड्यूटी उनसे ट्रस्ट के पदाधिकारी करवा रहे थे। एसआईटी ने इसको सबसे बड़ी लापरवाही में से एक माना है। लिहाजा इस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कई बिंदुओं पर सिफारिश की है। पहला बिंदु ये है कि नियमित बैंक कर्मी ही इसमें तैनात किए जाएंगे। जो कर्मी होंगे उनमें ट्रस्ट के पदाधिकारियों का किसी तरह का हस्ताक्षेप नहीं होगा। दान पात्रों की चाबी ट्रस्ट के एक पदाधिकारी के पास होगी, जिसकी निगरानी में ही गणना होगी।