मंदिर परिसर की सुरक्षा में पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात हैं। ये सभी जवान पूरी सख्ती बरतते हैं जिससे मंदिर व्यवस्था की सुरक्षा पुख्ता रहती है। दूसरी तरफ ट्रस्ट से रखे गए कर्मचारी गले में आईकार्ड लटकाकर हर जगह घूमते रहते हैं। जिस तरह से कर्मचारियों ने रकम पार की और वहां से लेकर गए, वह सुरक्षा व्यवस्था से भी खिलवाड़ है। क्योंकि साफ है कि उनकी तलाशी नहीं की गई, क्योंकि वह वहां के कर्मचारी थे। सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के कर्मचारियों की मंदिर परिसर के कोने-कोने तक पहुंच है। टिन्नू व अन्य लोगों ने ऐसे 50 से अधिक कर्मी रखे हुए हैं।
अब तक जिनके पास से रकम बरामद हुई, वह सभी 12 से 18 हजार रुपये प्रति माह के वेतन पर काम कर रहे थे। दिन से लेकर रात तक ये सभी मंदिर में ही रहते थे। इतने कम वेतन में इतना लंबा काम करने के पीछे की वजह अब समझ आ रही है। क्योंकि वह चढ़ावे की करोड़ों की रकम पार कर रहे थे इसलिए वेतन से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।