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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय को लेकर काम आया दबाव! नौ पेज की एसआईटी रिपोर्ट में था केवल इस पदाधिकारी जिक्र

Wed, 08 Jul 2026 03:32 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय को लेकर दबाव काम आया है। नौ पेज की एसआईटी रिपोर्ट में अनिल मिश्रा का नाम स्पष्ट लिखा था, लेकिन चंपत व किसी अन्य का नाम नहीं लिखा था। सभी आरोपियों की अलग-अलग भूमिका लिखी गई थी।
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ram mandir donation - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की एसआईटी जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों और कर्मियों को दोषी पाया गया है। इन सभी को घटना का जिम्मेदार बनाया गया है। लेकिन, नौ पेज की जांच रिपोर्ट में केवल एक पदाधिकारी अनिल मिश्रा का जिक्र है। चंपत राय व अन्य किसी का कोई जिक्र नहीं किया गया है। 
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ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि मामले में पहले चंपत को बचाने को लेकर दबाव बनाए जाने की जो चर्चा थी, क्या वह सही थी। दबाव काम आया, इसलिए चंपत का नाम नहीं है। ट्रस्ट की सोमवार को हुई बैठक के बाद एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई थी। जिसमें हर एक जिम्मेदार की भूमिका दर्ज थी। 
 
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सभी आरोपियों की अलग-अलग भूमिका लिखी गई थी। इसके अलावा पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के बारे में विस्तृत रूप से लापरवाही का जिक्र करते हुए उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े किए गए। लेकनि, उसमें चंपत राय व गोपाल का नाम शामिल नहीं है। 

हालांकि, एसआईटी रिपोर्ट के सातवें पेज पर लिखा गया है कि चोरी की घटना की जांच में सामने आया कि गणनाकर्मी तय की गई ड्रेस में नहीं थे, जिसकी वजह से रकम पार करना उनके लिए आसान हुआ। इसके लिए ट्रस्ट के सभी कर्मी व पदाधिकारी जिम्मेदार हैं। यहां पर एक तरह से एसआईटी ने ट्रस्ट से जुड़े प्रत्येक शख्स को एक तरह से दोषी बना दिया। 
 

ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को आरोपी बनाने की तैयारी
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को आरोपी बनाने की तैयारी है। एसआईटी रिपोर्ट को इसमें आधार बनाया जाएगा। कई पुख्ता साक्ष्य भी पुलिस को मिले हैं। साजिश में शामिल होने के आरोपी बनाए जा सकते हैं। हालांकि, अब तक किसी तरह का आधिकारिक बयान नहीं आया है।

 

मामले में शुरू से ही तीन नाम चर्चा में रहे। जिसमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव शामिल हैं। एसआईटी रिपोर्ट में चंपत राय व गोपाल के नाम का सीधे तौर पर कहीं भी जिक्र नहीं है। लेकिन, अनिल मिश्रा की भूमिका स्पष्ट रूप से लिखी गई है। 

 

सूत्रों के मुताबिक, अनिल मिश्रा के खिलाफ कई सुबूत भी सामने आए हैं। जिनकी तस्दीक पुलिस कर रही है। वहीं, एसआईटी रिपोर्ट को अपनी जांच में शामिल कर लिया है। कुछ ही दिन में एसआईटी उनको आरोपी बनाकर केस में नाम जोड़ सकती है। उधर, रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया है कि अनिल मिश्रा की मामले में सीधी जिम्मेदारी थी। उनके संबंध में उत्तरदायित्व इस आधार पर निर्धारित होता है कि उन्होंने सुरक्षा उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित नहीं किया। 

उनको पता था कि पूरा खेल हो रहा है, इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसलिए उनको दोषी पाया है। चूंकि जानकारी के बावजूद चोरी होती रही, इसलिए साजिश का आरोपी बनाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, केस की विवेचना के दौरान भी पुलिस को कई बैंक कर्मियों की मिलीभगत के सुबूत मिले हैं। इसलिए जांच की जद में बैंक अधिकारी व कर्मचारी भी हैं। तीन से चार बैंक कर्मियों पर कार्रवाई तय है।
 

चढ़ावा चोरी के लिए बैंक व अनिल मिश्रा जिम्मेदार : चंपत
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने लंबी चुप्पी तोड़ते हुए पूरे मसले के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और ट्रस्ट के सदस्य रहे अनिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया है। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को भेजे गए पत्र में उन्होंने दान की गणना प्रक्रिया से जुड़े कई बिंदुओं पर एसबीआई की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। एसआईटी को लिखे पत्र में उन्होंने अपने बयान को जांच के रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने का अनुरोध किया है।

 

उन्होंने पत्र में लिखा कि 6 फरवरी 2025 को जारी गणना प्रक्रिया के लिए बैंक और ट्रस्ट की ओर से संयुक्त रूप से निर्धारित दिशा-निर्देश से वह पूरी तरह असहमत हैं। इस दस्तावेज पर ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और एसबीआई अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक के हस्ताक्षर हैं। चंपत ने दावा किया कि उन्हें इस दिशानिर्देश पत्र की जानकारी 13 जून को ट्रस्ट के अकाउंट कार्यालय से मिली। 

उन्होंने कहा कि अगस्त 2020 से इस साल जून तक ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं के बीच हुए सभी महत्वपूर्ण अनुबंधों पर उनके हस्ताक्षर हैं, ऐसे में इस महत्वपूर्ण दस्तावेज पर उनसे हस्ताक्षर न कराना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि उस समय वह अयोध्या में नहीं थे तो उनके लौटने तक प्रतीक्षा की जानी चाहिए थी। 
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पत्र में उन्होंने 9 फरवरी 2024 को ट्रस्ट और एसबीआई के बीच हुए एमओयू का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस एमओयू के प्रत्येक पृष्ठ पर उनके हस्ताक्षर हैं और उसमें गणना प्रक्रिया की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, लोहे की जाली वाला दरवाजा सहित कई प्रावधान किए गए थे। हालांकि, इस वायरल पत्र पर अभी तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और एसआईटी की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
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