जो संदिग्ध पकड़े गए हैं, वे मामूली पैसों की नौकरी करते थे। कुछ लोगों ने पार की गई रकम से निवेश भी किया है। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। चूंकि नकदी अधिक थी, इसलिए उसे सही से ठिकाने नहीं लगाया जा सका। यही वजह है कि करोड़ों की नकदी बरामद हो चुकी है। कुछ ने अपने घर तो कुछ ने अपने रिश्तेदारों व परिचितों के घरों में भी नकदी छिपाई थी।
संदिग्धों के घर व ठिकानों के अलावा बैंक खाते भी खंगाले जा रहे हैं। इनमें अवनीश के खाते से पांच लाख रुपये मिले हैं। यह वही रकम है, जो उसने दान राशि से गायब कर अपने खाते में जमा की थी। इसके अलावा कुछ जेवरात भी मिले हैं। अवनीश के एक रिश्तेदार ने जमीन खरीदी है। आशंका है कि इस जमीन खरीद में अवनीश ने भी रकम लगाई है।
ट्रस्ट की चुप्पी तमाम सवाल पैदा कर रही है। क्या गबन के खेल के पीछे कोई बड़ा नाम सामने आ रहा है। इसलिए मामला दबाया जा रहा है। जब गबन का मामला खुला था, उसी वक्त पुलिस या अन्य किसी जांच एजेंसी या एसआईटी को जांच सौंप देनी चाहिए थे। इतने दिन बीतने के बाद एसआईटी की मांग गई है। ऐसे में सुबूत नष्ट करने का काफी वक्त भी मिला। अगर एसआईटी या अन्य एजेंसी तफ्तीश करती है तो मामले में बड़े खुलासे होने की आशंका है।