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राम मंदिर चंदा गबन: करोड़ों रुपयों के हेरफेर की आशंका, अब तक हो चुकी है 2.98 करोड़ की रिकवरी; ऐसे हुआ खेल

Sun, 14 Jun 2026 07:11 AM IST
रोहित मिश्र सूरज शुक्ला, अमर उजाला लखनऊ

सार

Ram Mandir donation embezzlement: राम मंदिर चंदा गबन में अब एक के बाद एक मामले सामने आ रहे हैं। अब तक हुई जांच में कई लोग पकड़े जा चुके हैं। 
 
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राम मंदिर चंदा विवाद। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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राम मंदिर की दान राशि में हुए गबन मामले में अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। यह रकम पकड़े गए संदिग्धों की निशानदेही पर बरामद की गई है। गुपचुप ढंग से चल रही जांच में आठ करोड़ रुपये से अधिक के हुए हेरफेर के संकेत व साक्ष्य मिले हैं। हालांकि जांच पूरी होने के बाद यह राशि घट या बढ़ भी सकती है।

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गबन का खुलासा जब से हुआ है, तब से ट्रस्ट गोपनीयता से जांच में जुटा है। पदाधिकारी चुप्पी साधे हैं। आधिकारिक तौर पर पुलिस को भी शामिल नहीं किया गया है, चूंकि करोड़ों का गबन हुआ है इसलिए रिकवरी की जद्दोजहद में सभी जुटे हैं। यह भी पता किया जा रहा है कि पकड़े गए संदिग्धों के अलावा और कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि गबन की राशि कुल कितनी है। हालांकि, संदिग्धों से पूछताछ में मिली जानकारी व अन्य साक्ष्यों से अंदेशा है कि आठ करोड़ से अधिक का खेल किया गया है।

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नकदी से लेकर निवेश तक छानबीन

जो संदिग्ध पकड़े गए हैं, वे मामूली पैसों की नौकरी करते थे। कुछ लोगों ने पार की गई रकम से निवेश भी किया है। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। चूंकि नकदी अधिक थी, इसलिए उसे सही से ठिकाने नहीं लगाया जा सका। यही वजह है कि करोड़ों की नकदी बरामद हो चुकी है। कुछ ने अपने घर तो कुछ ने अपने रिश्तेदारों व परिचितों के घरों में भी नकदी छिपाई थी।

खाते से मिले पांच लाख, जेवरात भी

संदिग्धों के घर व ठिकानों के अलावा बैंक खाते भी खंगाले जा रहे हैं। इनमें अवनीश के खाते से पांच लाख रुपये मिले हैं। यह वही रकम है, जो उसने दान राशि से गायब कर अपने खाते में जमा की थी। इसके अलावा कुछ जेवरात भी मिले हैं। अवनीश के एक रिश्तेदार ने जमीन खरीदी है। आशंका है कि इस जमीन खरीद में अवनीश ने भी रकम लगाई है।
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सवाल पैदा कर रही है ट्रस्ट की चुप्पी

ट्रस्ट की चुप्पी तमाम सवाल पैदा कर रही है। क्या गबन के खेल के पीछे कोई बड़ा नाम सामने आ रहा है। इसलिए मामला दबाया जा रहा है। जब गबन का मामला खुला था, उसी वक्त पुलिस या अन्य किसी जांच एजेंसी या एसआईटी को जांच सौंप देनी चाहिए थे। इतने दिन बीतने के बाद एसआईटी की मांग गई है। ऐसे में सुबूत नष्ट करने का काफी वक्त भी मिला। अगर एसआईटी या अन्य एजेंसी तफ्तीश करती है तो मामले में बड़े खुलासे होने की आशंका है।
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