रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू
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राम जन्म भूमि मंदिर में चढ़ावा धनराशि चोरी व गबन के मामले में जेल में निरुद्ध राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू व सुभाष श्रीवास्तव की पुलिस ने सात दिन के कस्टडी रिमांड की मांग की है। विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट में विशेष अभियोजन अधिकारी की ओर से विवेचना कर रहे आशुतोष तिवारी के प्रार्थना पत्र को पेश किया गया।
प्रार्थना पत्र में जेल में निरुद्ध आरोपी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू व सुभाष श्रीवास्तव को सात दिन के लिए पुलिस अभिरक्षा (कस्टडी) में दिए जाने की मांग की गई। विशेष अभियोजन अधिकारी ने रिमांड प्रार्थना पत्र पर तर्क दिया कि जेल में निरुद्ध आरोपियों की ओर से विवेचक को दिए गए बयान से नए तथ्य आए हैं जिसकी सत्यता की जांच के लिए आरोपी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू व सुभाष श्रीवास्तव को पुलिस कस्टडी में सात दिन का रिमांड दिया जाना आवश्यक है। विशेष न्यायाधीश ने मामले के विवेचक की ओर से प्रस्तुत रिमांड प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख नियत की है। राम जन्म भूमि मंदिर में चढ़ावा धनराशि चोरी के मामले में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव व रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को आरोपी बनाया गया है जो 26 जून से मंडल कारागार अयोध्या में निरुद्ध हैं।
रिमांड के दौरान तीन आरोपियों के पास से बरामद सामान का किया अवलोकन
विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट के न्यायाधीश के समक्ष रिमांड के दौरान आरोपी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा व करुणेश पांडेय के पास से बरामद हुए सामान को भी विवेचक ने प्रस्तुत किया। बरामदशुदा सामान का अवलोकन करने के बाद विवेचना में शामिल किए जाने के लिए मामले के विवेचक की सुपुर्दगी में दिए जाने का आदेश पारित किया गया।
अविनाश शुक्ला की 13 घंटे, लवकुश, अनुकल्प व करुणेश की 40 घंटे की पुलिस ले चुकी है रिमांड
दो जुलाई को विवेचक आशुतोष तिवारी ने अदालत से आरोपी की 48 घंटे के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड प्रार्थना में मांग की थी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अदालत के विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा ने रिमांड प्रार्थना पर सुनवाई के बाद केवल 13 घंटे के लिए ही आरोपी अविनाश की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर की थी। 13 घंटे की मिली पुलिस कस्टडी रिमांड में अविनाश शुक्ला के पास से एक कार व कई आभूषण बरामद हो चुके हैं। अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर चढ़ावा चोरी की रकम के बंटवारे का स्थान भी पुलिस ने चिह्नित किया है। वहीं सात जुलाई को आरोपी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा व करुणेश पांडेय की 40 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड की मंजूरी मिली थी। जबकि विवेचक ने कोर्ट से सात दिन के लिए रिमांड की मांग की थी।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पहली बार नियुक्त होने वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को मंदिर के प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन की व्यापक जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। ट्रस्ट का उद्देश्य मंदिर के संचालन को पेशेवर और जवाबदेह बनाना है। इसके लिए सीईओ चढ़ावे के प्रबंधन से लेकर हजारों कर्मचारियों की निगरानी, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और आधारभूत ढांचे के रखरखाव तक की जिम्मेदारी संभालेंगे।
सीईओ की सबसे अहम जिम्मेदारी मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन को पारदर्शी बनाना होगा। इसके लिए आधुनिक अकाउंटिंग सिस्टम लागू किया जाएगा और चार्टर्ड अकाउंटेंट व वित्तीय विशेषज्ञों की मदद से पूरी वित्तीय व्यवस्था की निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न रहे। मंदिर परिसर में सुरक्षा, सफाई, दर्शन व्यवस्था और अन्य सेवाओं में तैनात करीब 2500 कर्मचारियों के कार्यों की निगरानी भी सीईओ के जिम्मे होगी। कर्मचारियों के बीच समन्वय, ड्यूटी प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करना उनकी प्रमुख भूमिका होगी।
इसके अलावा सीईओ ट्रस्ट बोर्ड, उसके अध्यक्ष, राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने का कार्य करेंगे। प्रशासनिक निर्णयों के क्रियान्वयन और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल सुनिश्चित करना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। ट्रस्ट के अनुसार, सीईओ का पद राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में एक अहम बदलाव माना जा रहा है। 22 जुलाई की बैठक में सीईओ के नाम की घोषणा की जा सकती है। सीईओ के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन पहले ही कर दिया गया है।
भीड़ का प्रभावी प्रबंधन भी होगी चुनौती
हर दिन लाखों श्रद्धालुओं के दर्शन और त्योहारों के दौरान उमड़ने वाली भीड़ के प्रभावी प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सीईओ निभाएंगे। इसके लिए वह जिला प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय बनाकर दर्शन व्यवस्था, प्रवेश और निकास की योजना तैयार करेंगे। मंदिर परिसर में चल रहे शेष निर्माण कार्यों, भवनों के रखरखाव, सीसीटीवी नेटवर्क, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं की निगरानी भी सीईओ के दायित्व में शामिल होगी। ट्रस्ट की ओर से लिए गए निर्णयों को जमीन पर लागू कराने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी।