पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने उम्मीद जताई है कि इस साल के आखिर तक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में डे-टू-डे सुनवाई से अयोध्या विवाद का समाधान एक माह में निकल सकता है।
स्वामी रविवार को राजधानी में मीडियाकर्मियों से मुखातिब थे। इससे पहले उन्होंने विराट हिंदुस्तान संगम के प्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा, अयोध्या विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस में अब मैं पक्षकार बन गया हूं।
सुप्रीम कोर्ट को यह देखना है कि हाईकोर्ट के तीन जजों ने जो फैसला दिया था वह सही है या नहीं। डे-टू-डे सुनवाई कर इस विवाद का समाधान कराने के लिए हम हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के पूर्व अध्यक्ष शहाबुद्दीन से बात कर चुके हैं।
पर्सनल लॉ बोर्ड के चेयरमैन समेत सभी पक्षों से बातचीत चल रही है। वे विवाद के जल्द समाधान के लिए सहमत हैं।
'राम मंदिर तो बनेगा सरयू पार बाबरी मस्जिद भी'
स्वामी ने कहा, हम मंदिर निर्माण के लिए सम्मेलन या आंदोलन करने के पक्षधर नहीं हैं। हम जन्मभूमि में राम मंदिर और सरयू के उस पार बाबरी मस्जिद बनाने के पक्ष में हैं।
राम मंदिर के बाद मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और वाराणसी में बाबा विश्वनाथ मंदिर का विवाद हल कराएंगे। यदि मुसलमान अयोध्या, मथुरा और काशी में सहमति से विवाद निपटाते हैं तो शेष 40 हजार मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाने का मामला नहीं उठाया जाएगा।
राष्ट्रीय धरोहर घोषित हो रामसेतु
स्वामी ने कहा, मैंने चार साल तक रामसेतु के लिए लड़ाई लड़ी। केंद्र सरकार ने कहा है कि वह रामसेतु से छेड़छाड़ नहीं करेगी। हमारी मांग है कि रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए।
इसकी मरम्मत कर श्रीलंका तक जाने का पैदल मार्ग बनाया जाए ताकि लोग अशोक वाटिका तक जा सकें। उसके बाद अयोध्या से श्रीलंका तक रामायण रूट बनाया जाए।
चिदंबरम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाए केंद्र
स्वामी ने केंद्र सरकार से अटॉर्नी जनरल को निर्देश देने की मांग की कि वह सुप्रीम कोर्ट में पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम के खिलाफ अदालत की अवमानना की याचिका दायर करें। उन्होंने इशरत जहां मामले में अदालत में साक्ष्य बदले।
यदि चिदंबरम ने सोनिया गांधी के कहने पर ऐसा किया तो उन्हें भी सह आरोपी बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, यदि सरकार अदालत नहीं गई तो मेरे लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला है।
जेएनयू से बाहर किए जाएं पाक समर्थक
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जेएनयू में परीक्षा के बाद हॉस्टल खाली कराए जाएं। पाकिस्तान समर्थकों को वहां से बाहर किया जाए।
उन्होंने कहा, जेएनयू का नाम सुभाषचंद्र बोस के नाम पर रखने की मांग मैंने इसलिए की थी क्योंकि बोस आईसीएस टॉपर थे जबकि नेहरू कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में फेल हो गए थे।
एएमयू नहीं हो सकता अल्पसंख्यक संस्थान
स्वामी ने कहा कि सरकार अल्पसंख्यक संस्थान नहीं बना सकती। यह आर्टिकल-27 में संभव नहीं है। एएमयू यदि केंद्र से पैसा लेना बंद करे तो अल्पसंख्यक दर्जा संभव है।
ब्राह्मण-शूद्र का डीएनए एक जैसा
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग हिंदू हैं या उनके पूर्वज हिंदू थे। ब्राह्मण और शूद्र का डीएनए एक जैसा है। पहले कर्म के आधार पर बंटवारा था जाति के नहीं।
वाल्मीकि दलित थे, लेकिन महर्षि हुए। विश्वामित्र क्षत्रिय परिवार में पैदा होकर ऋषि बने।