राज्यपाल राम नाईक ने शनिवार को शिक्षा व्यवस्था की खामियों को तंज के सहारे बखूबी सामने रखा। कहा कि जब दूध की रखवाली बिल्ली से करवाई जाएगी तो विद्यार्थियों के हिस्से में ज्ञानरूपी दूध कैसे आएगा। जिनके ऊपर ज्ञान देने की जिम्मेदारी है वे अपनी भूमिका से बच रहे हैं। राज्यपाल ये विचार डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में रखे।
चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषय पर सेमिनार में बोलते हुए राज्यपाल ने आधुनिक शिक्षा में प्राचीन गुरुकुल शिक्षा का चूर्ण मिलाकर उच्च शिक्षा को सुधारने की सीख दी। कहा, शिक्षा के लिए कई आयोग बनने के बाद भी इसकी हालत में सुधार नहीं आ रहा है। इसकी वजह है सुझाव को व्यवहार में न लाया जाना।
प्राइमरी में नौ छात्र प्रवेश लेते हैं तो कॉलेज तक एक ही पहुंच पाता है। दस इंजीनियर में केवल चार ही भारतीय अच्छी नौकरी पाने के योग्य होते हैं। इसके कारणों पर विचार होना चाहिए। दीक्षांत समारोहों में अंग्रेजों के जमाने के गाउन और हाल ही में लखनऊ के एमबी क्लब में ड्रेस कोड के चलते मौलाना कल्वे जव्वाद को प्रवेश न दिये जाने का जिक्र करने के साथ राज्यपाल ने कॉलेजों में हो रही नकल पर भी प्रहार किया।राज्यपाल ने गुणवत्ता और ज्ञानपरक शिक्षा पर जोर देते हुए दिल्ली के एक कॉलेज का जिक्र किया।