गणना की निगरानी से लेकर दान पेटियों की चाबी तक टिन्नू के पास रहती थी। चूंकि मिलीभगत थी, तो सुभाष को पता था कि कुछ होने वाला नहीं है। सुभाष गणना में लवकुश, अनुकल्प, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, रमाशंकर मिश्र आदि की ड्यूटी लगाता था। ड्यूटी लगाने को लेकर कोई टोका-टाकी नहीं करता था। फिर आराम से रुपयों की गड्डियां पार करते थे। बाद में बंटवारा होता था।
संवेदनशील काम टिन्नू को सौंपना और फिर करोड़ों की रकम पार हो जाना कोई आम बात नहीं है। वह भी हाईटेक कैमरों के सामने। इसलिए ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर भी शक की सुई घूम रही है। फिलहाल एफआईआर में किसी का नाम शामिल नहीं है, लेकिन जब विवेचना आगे बढ़ेगी और दूसरी तरफ एसआईटी की विस्तृत तफ्तीश पूरी होगी, तब पता चल सकेगा कि पदाधिकारियों की कोई मिलीभगत थी या नहीं। फिलहाल पदाधिकारी शक के दायरे में हैं। भूमिका की जांच जारी है।
पूरे खेल में बैंक अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। टिन्नू और सुभाष इन बैंक वालों को एक तय हिस्सा दिया करते थे। सूत्रों ने बताया कि कई बार बैंक कर्मियों ने खुद भी रकम सीधे पार की है, जिसके कुछ साक्ष्य भी मिले हैं।