फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राम मंदिर चढ़ावा: FIR की भाषा से बढ़ा संदेह, आरोपियों के पिता का नाम नहीं, पते भी गायब; क्या छिपा रहा TRUST?

Sat, 27 Jun 2026 08:06 AM IST
रोहित मिश्र सूरज शुक्ला, अमर उजाला नेटवर्क लखनऊ

सार

Ram Mandir Trust:चढ़ावा चोरी मामले की एफआईआर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। एफआईआर में किसी भी आरोपी के पिता का नाम व पता नहीं लिखा गया है।
विज्ञापन
राम मंदिर चढ़ावा चोरी। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की एफआईआर को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। एफआईआर में किसी भी आरोपी के पिता का नाम व पता नहीं लिखा गया है। सवाल है कि क्या ट्रस्ट के पास अपने ही कर्मियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं रहती है। वहीं दूसरी तरफ केस में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लगाया गया है, मतलब इसमें कोई न कोई सरकारी कर्मचारी भी आरोपी है। वह बैंक का है। फिर भी उसको नामजद न करके अज्ञात कर दिया गया। इसके पीछे की मंशा सवाल खड़ा कर रही है।

विज्ञापन


एफआईआर में कुल आठ नामजद आरोपी हैं। इसमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव व रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू नामजद हैं। 9वें नंबर पर अज्ञात आरोपी है। एफआईआर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराया है। जितने आरोपी हैं वह मंदिर से जुड़े हैं ऐसे में मंदिर प्रशासन के पास उनके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं है। किसी भी आरोपी का पता व पिता का नाम नहीं है, सभी में अज्ञात दर्ज किया गया है। विवेचना में तो ये तथ्य सामने आ ही जाएंगे लेकिन ये स्थिति ट्रस्ट पर सवाल जरूर खड़ा करती है।

वहीं सबसे बड़ा सवाल है कि जब बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत उजागर हुई तो उनको नामजद क्यों नहीं किया गया है। क्या इसमें कोई खेल करना है, इसलिए वादी ने उनको नामजद नहीं कराया है। चोरी की घटना से लेकर एफआईआर दर्ज होने तक ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर उठ रहे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

विज्ञापन

तहरीर के सधे हुए शब्द, निर्देश ऊपर से मिले

प्रकरण में पीएमओ से निगरानी जारी है। उसके पीछे की वजह है कि ट्रस्ट केंद्र सरकार ने गठित किया था इसलिए पीएमओ को रिपोर्ट भी भेजी गई है। वहीं पीएमओ के अधिकारियों ने भी अपने स्तर से जांच की है। तहरीर के शब्द सधे हुए हैं। बहुत कम शब्दों की तहरीर दी गई है। जिसमें एसआईटी की आख्या व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का दावा करते हुए गबन करने का आरोप लगाया गया है। सूत्रों के मुताबिक तहरीर भले ट्रस्ट की तरफ से दी गई है लेकिन उसमें लिखे हर एक शब्द ऊपर से लिखवाए गए हैं।

धीरे धीरे बढ़ेगी रिकवरी

जब एसआईटी का गठन नहीं हुआ था तभी चर्चा थी कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने संदिग्धों को पकड़कर पूछताछ की थी। उनकी निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये बरामद किए हैं। हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान करीब 70 लाख रुपये बरामद किए हैं। सूत्रों ने बताया कि जैसे जैसे अन्य आरोपी गिरफ्तार किए जाएंगे वैसे वैसे रिकवरी भी बढ़ती जाएगी।

सीसीटीवी फुटेज से खुलासा....40 दिन में 70 बार चोरी की रकम

 राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। 40 दिनों में करीब 70 बार चोरी करते आरोपी सीसीटीवी में कैद हुए। एसआईटी और पुलिस दोनों के पास फुटेज मौजूद हैं। साक्ष्य के तौर पर फुटेज जांच में शामिल किए गए हैं।

चोरी का मामला जब खुला था तब फुटेज सामने आए थे। जिनको ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सुरक्षित रख लिया था। सूत्रों के मुताबिक ये फुटेज एसआईटी ने कब्जे में लिए थे। जिसमें नामजद आरोपी रकम पार करते हुए कैद हुए थे। अब तक की जांच में पता चला है कि जो फुटेज हैं उसमें 70 बार से अधिक चोरी करते आरोपी नजर आए हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी रकम पार की गई है। क्योंकि ये सिर्फ 40 दिनों के भीतर का आंकड़ा है। ये खेल पिछले दो तीन वर्षों से चल रहा था।


 
विज्ञापन

एसआईटी की जांच होने तक नहीं दूंगा कोई बयान : नृपेंद्र मिश्र

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र। - फोटो : amar ujala
श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि जब तक राममंदिर के चंदा गबन प्रकरण में एसआईटी की जांच चल रही है, तब तक वह इस मसले पर कोई बयान नहीं देंगे। अभी एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच ही सौंपी है। जांच की प्रक्रिया अभी चल रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया में कोई उनके हवाले से कुछ चला रहा है, तो ऐसा करने वाले महापाप कर रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें