प्रकरण में पीएमओ से निगरानी जारी है। उसके पीछे की वजह है कि ट्रस्ट केंद्र सरकार ने गठित किया था इसलिए पीएमओ को रिपोर्ट भी भेजी गई है। वहीं पीएमओ के अधिकारियों ने भी अपने स्तर से जांच की है। तहरीर के शब्द सधे हुए हैं। बहुत कम शब्दों की तहरीर दी गई है। जिसमें एसआईटी की आख्या व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का दावा करते हुए गबन करने का आरोप लगाया गया है। सूत्रों के मुताबिक तहरीर भले ट्रस्ट की तरफ से दी गई है लेकिन उसमें लिखे हर एक शब्द ऊपर से लिखवाए गए हैं।
जब एसआईटी का गठन नहीं हुआ था तभी चर्चा थी कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने संदिग्धों को पकड़कर पूछताछ की थी। उनकी निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये बरामद किए हैं। हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान करीब 70 लाख रुपये बरामद किए हैं। सूत्रों ने बताया कि जैसे जैसे अन्य आरोपी गिरफ्तार किए जाएंगे वैसे वैसे रिकवरी भी बढ़ती जाएगी।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। 40 दिनों में करीब 70 बार चोरी करते आरोपी सीसीटीवी में कैद हुए। एसआईटी और पुलिस दोनों के पास फुटेज मौजूद हैं। साक्ष्य के तौर पर फुटेज जांच में शामिल किए गए हैं।
चोरी का मामला जब खुला था तब फुटेज सामने आए थे। जिनको ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सुरक्षित रख लिया था। सूत्रों के मुताबिक ये फुटेज एसआईटी ने कब्जे में लिए थे। जिसमें नामजद आरोपी रकम पार करते हुए कैद हुए थे। अब तक की जांच में पता चला है कि जो फुटेज हैं उसमें 70 बार से अधिक चोरी करते आरोपी नजर आए हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी रकम पार की गई है। क्योंकि ये सिर्फ 40 दिनों के भीतर का आंकड़ा है। ये खेल पिछले दो तीन वर्षों से चल रहा था।
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र।
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श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि जब तक राममंदिर के चंदा गबन प्रकरण में एसआईटी की जांच चल रही है, तब तक वह इस मसले पर कोई बयान नहीं देंगे। अभी एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच ही सौंपी है। जांच की प्रक्रिया अभी चल रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया में कोई उनके हवाले से कुछ चला रहा है, तो ऐसा करने वाले महापाप कर रहे हैं।