सपा के बागी विधायको के साथ अमित शाह। बीते चुनाव के समय की तस्वीर।
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पिछले चुनाव में सपा के कई विधायकों के बगावती रुख ने भाजपा के लिए रास्ता बनाया था। इनमें मनोज कुमार पांडेय, पूजा पाल, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, विनोद चतुर्वेदी, आशुतोष मौर्या और महाराजी देवी जैसे नाम शामिल रहे हैं। भाजपा इन विधायकों में से कुछ को अब अपने राजनीतिक पाले में मानकर चल रही है। हालांकि, मौजूदा संख्या बल के लिहाज से नौवीं सीट के लिए 25 अतिरिक्त वोट जुटाना अभी बड़ी चुनौती है। वहीं पार्टी के गंभीर सूत्र का कहना है कि सपा के तमाम विधायक भाजपा के संपर्क में तो है, लेकिन वे 2027 के चुनाव में टिकट की गारंटी पर ही भाजपा को वोट देने की बात कर रहे हैं।
हालांकि भाजपा के लिए आठवीं सीट का गणित पहले ही अतिरिक्त समर्थन पर निर्भर है और नौवीं सीट की कवायद उसे और कठिन मुकाबले में ले जाएगी। ताजा चुनावी गणित में भी आठवीं और उससे आगे की सीटों के लिए अतिरिक्त विधायकों के समर्थन को निर्णायक माना जा रहा है। ऐसे में नामांकन से मतदान तक भाजपा और सपा की नजर अपने-अपने विधायकों के साथ दूसरे खेमे के संभावित असंतुष्टों पर रहेगी। नौवीं सीट के लिए 25 वोटों की यह तलाश ही राज्यसभा चुनाव की सबसे बड़ी सियासी कवायद बनती दिख रही है।