फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी में राज्यसभा चुनाव: आठ सीटों के बाद भाजपा की नजर नौंवी पर, चाहिए और 25 वोट; निगाहें सपा के बागियों पर

Thu, 01 Oct 2026 07:12 AM IST
रोहित मिश्र सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला लखनऊ

सार

 राज्यसभा की एक सीट के लिए 36 वोट का कोटा माना जाए तो आठ सीटों के लिए 288 वोट चाहिए। नौंवी सीट के लिए उसके पास 25 वोट कम पड़ रहे हैं। 
विज्ञापन
- फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में होने जा रहे इस बार का राज्यसभा चुनाव विधायकों में तोड़-फोड़ का नया सियासी इबारत लिखने जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने-अपने संख्या बल के आधार पर सीटों का गणित बैठाने में जुटे हैं। भाजपा जहां अपने आठ उम्मीदवारों की जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है, वहीं अब उसकी नजर नौवीं सीट पर भी है। भाजपा का दावा है कि उसके पास आठवें उम्मीदवार को जिताने के लिए तो पर्याप्त संख्या बल तो है ही, बल्कि उसके पास अतिरिक्त 25 वोट हैं। इसलिए वह अपना नौंवा उम्मीदवार भी उतारने पर विचार कर रही है। इस अतिरिक्त वोट की व्यवस्था के लिए भाजपा विपक्षी खेमे, खासकर सपा में सेंधमारी की संभावनाएं तलाश रही है।

विज्ञापन


गणित के मुताबिक, राज्यसभा की एक सीट के लिए 36 वोट का कोटा माना जाए तो आठ सीटों के लिए 288 वोट चाहिए। भाजपा अपने 259 विधायकों के साथ सहयोगी दलों के विधायकों और उसके साथ खड़े माने जा रहे असंबद्ध विधायकों को मिलाकर करीब 299 वोटों के आधार पर रणनीति बना रही है। इस हिसाब से आठ उम्मीदवारों को जिताने के बाद भी उसके पास 11 वोट अतिरिक्त बचेंगे।

यही 11 वोट भाजपा की नौवीं सीट की कोशिश का आधार हैं। नौवें उम्मीदवार के लिए 36 वोट चाहिए होने पर पार्टी को 25 और वोट जुटाने होंगे। यह संख्या अपने दम पर पूरी करना भाजपा के लिए संभव नहीं है। ऐसे में उसकी नजर सपा के उन विधायकों पर है, जो पिछले राज्यसभा चुनाव में पार्टी लाइन से अलग जाकर मतदान कर चुके हैं या जिनके भाजपा से राजनीतिक समीकरण बने हैं।

विज्ञापन

पिछले चुनाव में यह बने थे बागी

सपा के बागी विधायको के साथ अमित शाह। बीते चुनाव के समय की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
पिछले चुनाव में सपा के कई विधायकों के बगावती रुख ने भाजपा के लिए रास्ता बनाया था। इनमें मनोज कुमार पांडेय, पूजा पाल, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, विनोद चतुर्वेदी, आशुतोष मौर्या और महाराजी देवी जैसे नाम शामिल रहे हैं। भाजपा इन विधायकों में से कुछ को अब अपने राजनीतिक पाले में मानकर चल रही है। हालांकि, मौजूदा संख्या बल के लिहाज से नौवीं सीट के लिए 25 अतिरिक्त वोट जुटाना अभी बड़ी चुनौती है। वहीं पार्टी के गंभीर सूत्र का कहना है कि सपा के तमाम विधायक भाजपा के संपर्क में तो है, लेकिन वे 2027 के चुनाव में टिकट की गारंटी पर ही भाजपा को वोट देने की बात कर रहे हैं।
विज्ञापन

25 वोटों की तलाश है भाजपा को 

हालांकि भाजपा के लिए आठवीं सीट का गणित पहले ही अतिरिक्त समर्थन पर निर्भर है और नौवीं सीट की कवायद उसे और कठिन मुकाबले में ले जाएगी। ताजा चुनावी गणित में भी आठवीं और उससे आगे की सीटों के लिए अतिरिक्त विधायकों के समर्थन को निर्णायक माना जा रहा है। ऐसे में नामांकन से मतदान तक भाजपा और सपा की नजर अपने-अपने विधायकों के साथ दूसरे खेमे के संभावित असंतुष्टों पर रहेगी। नौवीं सीट के लिए 25 वोटों की यह तलाश ही राज्यसभा चुनाव की सबसे बड़ी सियासी कवायद बनती दिख रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें