लिंब सेंटर प्रभारी शगुन के साथ कृत्रिम पैरों पर खड़ा राजू।
लखनऊ। छह साल पहले ट्रेन हादसे में दोनों पैर गंवाने वाले बाराबंकी के युवक राजू की जिंदगी में अब नई उम्मीद लौट आई है। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप और केजीएमयू के डॉक्टरों की मेहनत से राजू फिर अपने पैरों पर खड़ा हो गया है। अब वह न केवल खुद चल सकता है, बल्कि सीढ़ियां चढ़ने, बैठने-उठने और दैनिक काम भी आसानी से कर सकेगा।
बाराबंकी के रामनगर तहसील स्थित लोहटी जेई गांव निवासी मजदूर फूलचंद्र का बेटा राजू वर्ष 2018 में घाघरा घाट रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरते समय हादसे का शिकार हो गया था। गंभीर चोटों के कारण केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में उसकी जान बचाने के लिए एक पैर घुटने के ऊपर और दूसरा घुटने के नीचे से काटना पड़ा।
सीएम के जनता दरबार से मिली नई राह
आर्थिक तंगी के कारण परिवार कृत्रिम पैर लगवाने में सक्षम नहीं था। इस वर्ष जनवरी में परिजनों ने मुख्यमंत्री जनता दरबार में मदद की गुहार लगाई। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राजू का मामला केजीएमयू के शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग को सौंपा गया।
ढाई महीने के प्रशिक्षण से लौटा आत्मविश्वास
विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल गुप्ता और डॉ. आराधना की देखरेख में पहले राजू के पैरों में पड़े छालों का उपचार किया गया। इसके बाद राजू के दोनों कृत्रिम पैर तैयार किए गए। आवश्यक सामग्री का इंतजाम दान और संस्थान की योजनाओं के माध्यम से किया गया। कृत्रिम पैर लगाने के बाद राजू को करीब ढाई महीने तक विशेष प्रशिक्षण दिया गया। अब वह आत्मविश्वास के साथ खुद चलने लगा है और सोमवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई दी।