केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कश्मीरी समझ लें कि उनकी समस्या का समाधान पत्थरबाजी से नहीं, बातचीत से होगा। कुछ स्वार्थी तत्वों के उकसावे पर मासूम बच्चों के हाथों में पत्थर न थमाएं। उनका भविष्य बर्बाद न करें। पत्थरबाजी बंद करें। शांति व्यवस्था बहाल करें।
केंद्र उनकी समस्याओं पर बात भी करेगा और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख का विकास भी। गृहमंत्री ने कहा कि कश्मीरियों को समझ लेना चाहिए कि सीमा पार के लोगों के लिए कश्मीर सिर्फ जमीन का टुकड़ा है जबकि हमारे लिए वह अपने शरीर का एक हिस्सा है।
कुछ ताकतें हिंदू, मुसलमान के आधार पर देश के विभाजन का सपना देख रही हैं। उन्हें समझ लेना चाहिए कि चाहे जितनी भी साजिशें कर लें, पर अब कोई ताकत हिंदू या मुसलमान के आधार पर देश का विभाजन नहीं करा पाएगी। हिंदुस्तान एकमात्र ऐसा देश है जहां मुसलमानों के सभी 70 फिरके हैं और इसाइयों के भी सभी तबके।
गृहमंत्री शनिवार को यहां लखनऊ विश्वविद्यालय के स्टेडियम में छत्रपति शिवाजी महाराज की अश्वारोही प्रतिमा का अनावरण करने के बाद मालवीय सभागार में लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने स्टेडियम का नाम छत्रपति शिवाजी के नाम पर रखने की घोषणा की।
'कश्मीरियों को उकसा कर उन्हें पढ़ने-लिखने नहीं दे रहे कुछ लोग'
उन्होंने नाम लिए बगैर पाकिस्तान पर निशाना साधा। कहा कि कुछ लोग अपनी नापाक हरकतों से बच्चों को पत्थरबाजी के लिए उकसा रहे हैं। वे चाहते हैं कि कश्मीरियों की भावी पीढ़ी पढ़ने-लिखने के बजाय इन कामों में उलझी रहे। कश्मीरियों को इससे सावधान रहना चाहिए।
गृहमंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों पर पत्थर फिंकवाने वाले कश्मीरियों को ध्यान रखना चाहिए कि इन्हीं जवानों ने बाढ़ के दौरान अपनी जान पर खेलकर उन्हें बचाया था। उनके बच्चों व महिलाओं को सुरक्षित निकाला था।
राजनाथ ने छात्रों का आह्वान किया कि प्रदेश या देश के किसी भी शैक्षिक संस्थान में यदि कोई कश्मीरी छात्र पढ़ रहा हो तो उसे प्रेम से समझाएं। उसके साथ दुर्व्यवहार न करें।
उन्हें सच्चाई बताएं कि यह उनका देश है, जिसमें उनका सम्मान और स्वाभिमान सुरक्षित है। जो लोग उनके दिमाग में अलग होने की बात भरते हैं, वे उनके हितैषी नहीं हैं।
'शिवाजी ने दिया आदेश, न होने पाए किसी महिला का अपमान'
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि नेताओं को छत्रपति शिवाजी से सीख लेनी चाहिए। आज नेता परिवारवाद के चक्कर में फंस जाते हैं लेकिन शिवाजी को जब मालूम हुआ कि उनका पुत्र संभाजी औरंगजेब से मिल गया है तो उन्होंने उसे कठोर कारावास में भेज दिया।
आज आए दिन महिलाओं के साथ आए जिस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, उनको देखते हुए भी शिवाजी का शासन याद आ जाता है। शिवाजी ने युद्ध के दौरान भी सैनिकों को हुक्म दे रखा था कि किसी महिला और बच्चे का अपमान न होने पाए।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निमसे ने गृहमंत्री, राज्यपाल और प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार उत्तम पाचरणे को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।