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राजनाथ ने लखनऊ को दिए सिर्फ तीन मिनट

Mon, 21 Apr 2014 03:46 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
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राजधानी के ईको गार्डेन के पास राजनाथ सिंह देश-दुनिया के मुद्दों पर तो खूब बोले। गांधी परिवार पर भी जमकर बरसे, लेकिन 35 मिनट की उनकी तकरीर में लखनऊ के हिस्से में महज तीन मिनट ही आए।
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मौजूद लोगों को जहां यह नागवार लगा, वहीं कार्यकर्ताओं को भी शहर के मुद्दे तफसील से न रखना खटका।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा प्रत्याशी राजनाथ सिंह ने सबसे ज्यादा तीर कांग्रेस पर चलाए।

कहा, जवाहर लाल नेहरू ने भारत निर्माण का नारा दिया था और 50 साल बाद राहुल गांधी भी वही राग अलाप रहे हैं। यानी अभी तक हिन्दुस्तान की तरक्की सिफर है।

सपा बसपा एक जैसी

उन्होंने सपा-बसपा और कांग्रेस को एक ही सिक्के के दो पहलू बताए। विदेशों में जमा काले धन से लेकर सीमा पर सैनिकों के सिर काटने जैसे मुद्दों और पाकिस्तान से लेकर चीन तक की भारत को लेकर रणनीतियों पर तो उन्होंने जमकर भाषणबाजी की।

लेकिन बात जब लखनऊ के बारे में बोलने की आई तो महज तीन मिनट में ही अपनी बात खत्म कर दी।

उन्होंने शुरुआत अटल बिहारी वाजपेई की उपलब्धियों से की, फिर जनता का आशीर्वाद मांगा और ट्रैफिक, सीवर व अनाधिकृत कॉलोनियों की समस्या दूर करने की बात कहकर शांत हो गए।

गौरतलब है कि राजनाथ लखनऊ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन वह लखनऊ से ज्यादा राष्ट्रीय राजनीति की बातें कर रहे थे जिससे स्रोता नाराज दिखे।

लाल जी टंडन भी मौजूद थे

भीड़ में मौजूद लोगों को लखनऊ के मुद्दों पर इतना कम वक्त देना नागवार गुजरा। सुगबुगाहट शुरू हो गई कि जनता को लोकल मुद्दों से असल मतलब होता है।

फिर इतने कम वक्त के लिए क्षेत्र में आए हैं और समस्याओं पर कुछ बात भी नहीं की। जनसभा में सुनीता दुग्गल, शिवकुमार, लालजी टण्डन, महापौर दिनेश शर्मा, संयुक्ता भाटिया, मनोहर सिंह, सुरेश चंद्र तिवारी मौजूद रहे।

इसके पहले राजनाथ सिंह ने कल लखनऊ के पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक व दलित बहुल क्षेत्र में एक सभा को संबोधित किया था।

जिसमें उन्होने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के नाम व अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में किए गए काम को गिनाकर लोगों से समर्थन मांगा।
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दलित नेता ने की थी राजनाथ की तारीफ

चुनाव से पहले भाजपा में शामिल होने वाले दलितनेता उदितराज ने राजनाथ सिंह की तारीफ करते हुए कहा था कि पहली बार ऐसा हो रहा है कि सामाजिक न्याय की अगुवाई करने वाले राम विलास पासवान, रामदास अठावले जैसे बड़े नेता एनडीए के साथ आ गए।

दलितों की एक नेता को छोड़कर (मायावती की ओर इशारा) सभी ताकतें भाजपा में हैं। लोग भौचक हैं कि सारे दलित नेता भाजपा में क्यों जा रहे हैं?

उन्होंने कहा, इसका श्रेय राजनाथ के राजनीतिक कौशल को जाता है। उदित राज के बाद भाजपा अध्यक्ष ने भी दलित व अल्पसंख्यकों के नेताओं को पार्टी से जोड़ने में मिली कामयाबी को बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया।

राजनाथ लखनऊ में जमकर सभाएं कर वोटों को साधने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन लखनऊ सीट से लड़ने के बावजूद लखनऊ पर न बोलना, जनता को अखर जरूर रहा है।
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