सैनिकों में बढ़ते अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति पर जल्द रोक लगेगी। इसके लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजिकल रिसर्च (डीआईपीआर) ने कॉम्बैट एप बनाया है। इसके जरिये सैनिकों की मनोदशा के बदलाव पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। फिलहाल इस एप का ट्रायल आर्मी वार कॉलेज महू में किया जा रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। एप में तीनों सेना के जवानों और अधिकारियों की मनोदशा पर लगातार नजर बनाए रखने के फीचर शामिल हैं।
डीआईपीआर के टेक्निकल अधिकारी शुभम ने बताया कि कॉम्बैट एप से जवानों व अधिकारियों की मनोदशा को आसानी से भांपकर उनके हित में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बाद काउंसलिंग कर उन्हें अवसाद से निकालने में मदद मिलती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चार साल में 437 सैन्यकर्मियों ने आत्महत्या की। इनमें सेना के 340, नौसेना के 18 और वायुसेना के 79 जवान व अधिकारी शामिल हैं। जबकि इस दौरान जंग में महज 237 जवानों व अधिकारियों की मौत हुई थी।
एंटी ड्रोन तकनीकी जल्द सौंपेंगे सेना को
लखनऊ। डीआरडीओ एंटी ड्रोन तकनीकी विकसित कर रही है। जल्द इसे सेनाओं को सौंपा जाएगा। डीआरडीओ के चेयरमैन जी. सतीश रेड्डी ने बताया कि पांच बिलियन डॉलर का निर्यात करने की बात पीएम मोदी ने कही है। इसमें डीआरडीओ का अहम योगदान रहेगा। वहीं डीआरडीओ ने यूपी डिफेंस कॉरिडोर के लिए एमओयू भी किया है।
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नौसेना के गोताखोरों का काम संभालेगा आरओवी
जंगी जहाजों की जांच के लिए अब नौसेना के गोताखोरों को अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ेगी। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर आधारित रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) जहाजों की न केवल जांच करेगा। बल्कि जरूरत पड़ने पर उसकी रखरखाव भी कर सकेगा।
मंझगांव डॉक शिपबिल्डर्स की ओर से आईआईटी चेन्नई व प्लेनिस टेक्नोलॉजी की ओर से संयुक्त रूप से इस आरओवी को तैयार किया गया है।
इसका प्रदर्शन डिफेंस एक्सपो में भी शिपबिल्डर्स की ओर से किया गया है। निदेशक शिपबिल्डिंग रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) एके सक्सेना ने बताया कि मंझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लि. की ओर इसका ट्रायल वगैरह हो चुका है। निर्यात करने की तैयारी है। इस तकनीक से काम भी जल्द होगा। प्लेनिस टेक्नोलॉजी के संतोष ने बताया कि आरओवी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर काम करता है। इसकी क्षमता 200 मीटर तक गोता लगाने की है।
इस बुलेट प्रूफ जैकेट को 14 गोलियां भी नहीं भेद पाएंगी
अब सेना के जवानों के लिए ऐसी बुलेट प्रूफ जैकेट तैयार होगी जिसे 14 गोलियां भी नहीं भेद जाएंगी। जवानों के लिए सिर से पांव तक का मजबूत सुरक्षा कवच तैयार होगा। झांसी में छह हजार एकड़ में यूनिट लगाने जा रही टाइटन एविएशन एंड एरोस्पेस कंपनी इस पर काम करेगी। कंपनी बुलेट प्रूफ हेलमेट भी तैयार करेगी। तीन साल में यूक्रेन टेक्नोलॉजी से जैकेट बना ली जाएगी। यह कंपनी झांसी में लड़ाकू विमान का इंजन भी बनाएगी।
टाइटन एविएशन एंड एरोस्पेस इंडिया लि. छह हजार एकड़ में यूनिट लगा रही है। इस सेक्टर में 38 हजार करोड़ से अधिक निवेश की संभावना है। कंपनी के चेयरमैन के गिरी कुमार ने बताया कि हम डिफेंस और एरोस्पेस से संबंधित काम करेंगे। ब्यूरो
सियाचिन में जवानों के लिए सब्जियां उगा रहा डीआरडीओ
लखनऊ। डीआरडीओ जवानों के लिए सियाचिन में सब्जियां उगा रहा है। इससे जवानों को वहां माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी ताजी और हरी सब्जियां खाने को मिल रही हैं। इस दिशा में डीआरडीओ की सैन्य शोध प्रयोगशाला (डीआरएल) काम कर रही है।
यूपी को अन्य उद्योगों के साथ ही विमानन क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए राज्य सरकार विश्वविद्यालयों में विमानन तकनीक को पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना बना रही है। एमएसएमई व निर्यात प्रोत्साहन मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने डिफेंस एक्सपो में इसके स्पष्ट संकेत दिए।
प्रदेश में उद्योगों की स्थापना को लेकर रक्षा व अन्य उत्पादों से जुड़ी विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों से वार्ता के दौरान मंत्री ने सरकार की यह मंशा जाहिर की। शासन की मंशा साकार करने के लिए उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनी एयरबस से सहयोग की अपेक्षा की।
उन्होंने कंपनी से कहा कि वह प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में कौशल विकास से जुड़े पाठ्यक्रमों को शुरू करने में सहयोग करे। उन्होंने सुझाव दिया कि नोएडा में विमानन उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए एक डिजाइन सेंटर स्थापित किया जा सकता है। विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने कहा कि तकनीकी विश्वविद्यालयों में भी विमानन तकनीक का पाठ्यक्रम शुरू करने पर मंथन चल रहा है।
आज एक्सपो का अंतिम दिन, सिर्फ दोपहर में होगा एयर शो
डिफेंस एक्सपो में एयर शो का लुत्फ उठाने का अंतिम मौका रविवार को है। वृंदावन में सिर्फ दोपहर में ही एयर शो होगा, वहीं गोमती रिवर फ्रंट पर सुबह लाइव डिमॉन्सट्रेशन किया जाएगा।